लाल बहादुर शास्त्री का जय जवान-जय किसान का नारा नहीं भूलेगा देशवासी
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से रविवार को सुभाष नगर में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि मनायी गयी.
पुण्यतिथि पर याद किये गये पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मुंगेर. अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से रविवार को सुभाष नगर में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि मनायी गयी. अध्यक्षता साहित्यकार मधुसूदन आत्मीय ने की, जबकि संचालन अलख निरंजन कुशवाहा ने की. उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्य वक्ता गिरजा शंकर नलिन ने कहा की लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद यात्रा भारतवासियों के लिए एक बड़ी त्रासदी रही. उन्होंने जय जवान-जय किसान का जो नारा दिया, उसे कभी देश और देशवासी नहीं भूल सकते है. यह नारा देशवासियों के दिलों में आज भी देशभक्ति की लौ जगा रही है. आज देश के जवानों के लिए वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह सरहद पर मजबूती ला रहे हैं. यह सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. मुधुसूदन आत्मीय ने कहा कि वर्तमान दौर के विद्यार्थियों को उनके जीवन से अधिक प्रेरणा लेनी चाहिए. अर्थ के अभाव में जब वह नदी पार कर के स्कूल जाया करते थे, तब सर पर पुस्तकों को रख कर छाती तक उन्हें डूबना कर स्कूल जाते थे. उन्होंने कहा कि शास्त्री जी जितने छोटे कद के थे, उतनी ही बड़ी उनकी उपलब्धि थी. नरेंद्र कुमार, छात्रा कोमल, नूतन, वंदना और सुबोध छवि, प्रमोद निराला ने भी अपने-अपने विचार रखें.
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