मुंगेर का 500 साल पुराने पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर की क्या है खासियत? यहां पूरी होती है हर मनोकामना, इसलिए कहते हैं ‘मिनी देवघर’

Aaj Ka Darshan: मुंगेर के पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर का इतिहास, धार्मिक मान्यता और सावन में इसकी खास महिमा जानें. यह मंदिर ‘लघु देवघर’ के नाम से भी प्रसिद्ध है.

हवेली खड़गपुर से रतन झा की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: सावन का महीना शुरू होते ही बिहार के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. लेकिन मुंगेर में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर भी है, जहां लोग सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपनी अधूरी मनोकामनाओं को लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर प्रार्थना भगवान शिव जरूर सुनते हैं.

मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में स्थित पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. पांच मुख वाले भगवान शिव के इस दुर्लभ स्वरूप के कारण यह मंदिर पूरे इलाके में खास पहचान रखता है. यही वजह है कि इसे पंचवदन स्थान और ‘लघु देवघर’ के नाम से भी जाना जाता है.

आखिर क्यों कहा जाता है इसे पंचमुखी नाथ महादेव?

मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर और हवेली खड़गपुर मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है. मंदिर नगर की दक्षिण-पूर्वी सीमा पर स्थित है और यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.

भगवान शिव की पांच मुख वाली प्रतिमा के कारण इस मंदिर का नाम पंचमुखी नाथ महादेव पड़ा. स्थानीय लोग इसे पंचबदन महादेव मंदिर और पंचवदन स्थान के नाम से भी जानते हैं. आसपास के दर्जनों गांवों के अलावा दूर-दराज के जिलों से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.

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Aaj Ka Darshan सावन में क्यों बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़?

सावन का महीना आते ही इस मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. बड़ी संख्या में कांवरिये सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर यहां पहुंचते हैं और बाबा पंचमुखी नाथ का जलाभिषेक करते हैं.

स्थानीय मान्यता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा का जलाभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही विश्वास हर साल हजारों श्रद्धालुओं को इस मंदिर तक खींच लाता है.

‘लघु देवघर’ के नाम से भी है प्रसिद्ध

बाबा बैद्यनाथ धाम की तरह यहां भी सावन में जलाभिषेक की विशेष परंपरा है. इसी वजह से पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर को स्थानीय लोग ‘लघु देवघर’ भी कहते हैं.

श्रद्धालुओं का मानना है कि जो लोग किसी कारणवश देवघर नहीं जा पाते, वे यहां जल चढ़ाकर भी भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं. इसी आस्था ने इस मंदिर को पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाई है.

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15वीं शताब्दी का बताया जाता है मंदिर का इतिहास

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पंचमुखी नाथ महादेव मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में एक राजा द्वारा कराया गया था. समय के साथ यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं रहा, बल्कि इलाके की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन गया.

आज भी यह मंदिर मुंगेर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. सावन हो या महाशिवरात्रि, यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दूर से आने वाले भक्त भगवान शिव के दर्शन कर सुख, शांति और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं.

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Published by: Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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