Munger news : हिट एंड रन केस में जागरूकता की कमी से नहीं मिलता लाभ

Munger news : अप्रैल 2022 में हिट एंड रन कानून बना, पर मुंगेर जिले में अब तक मात्र 39 मृतक के आश्रितों को ही इस कानून के तहत लाभ मिल सका है.

Munger news : मुंगेर जिले से एनएच-80, एनएच-333 और एनएच 333 बी गुजरा है. इसके अलावा भी स्टेट हाइवे के अतिरिक्त सड़कों का जाल बिछा हुआ है. इस पर हर साल लगभग 80 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में होती है और 200 से अधिक लोग घायल हो जाते हैं.

मुआवजा पानेवालों की संख्या है काफी कम

ऐसे ही पीड़ित लोगों की मदद के लिए सरकार ने अप्रैल 2022 में हिट एंड रन कानून बनाया. इसके तहत मृतक के आश्रित को दो लाख और घायल के परिवार को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है. पर, मुंगेर जिले में अब तक मात्र 39 मृतक के आश्रितों को ही इस कानून के तहत लाभ मिल सका है. यह आंकड़ा बता रहा है कि जानकारी के अभाव में मृतक व घायलों के परिवार इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे.मोटर वीइकल एक्ट की धारा-161 के तहत केंद्र सरकार ने हिट एंड रन केस में विक्टिम के लिए मुआवजे की स्कीम बनायी है, जो 01 अप्रैल 2022 से लागू है. पर, मुआवजा पानेवाले लोगों की संख्या काफी कम है. परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हिट एंड रन मामले के कुल 102 आवेदन विभाग को प्राप्त हुए हैं. इसमें 72 मामलों पर विभागीय स्तर पर संज्ञान लिया गया. इसके बाद 69 मामलों को जीआइसी मुंबई को भेजा गया. इसमें अब तक 39 मृतकों के आश्रित को 2-2 लाख रुपये इस योजना के तहत मुआवजा राशि के तौर पर भुगतान हो चुका है. जबकि मात्र ती घायलों को ही प्रति घायल 50 हजार के हिसाब से मुआवजा राशि का भुगतान किया जा सका है.

जानकारी के अभाव में नहीं उठा पा रहे लाभ

हादसों की संख्या और मुआवजे के मामले में काफी फर्क है. इसके पीछे एक कारण यह है कि विक्टिम और मृतक के परिजनों को योजना के बारे में जानकारी का अभाव है. कई मामलों में हिट एंड रन में मृतक के परिजनों को मुआवजा इसलिए नहीं मिल पाया है, क्योंकि कई मामलों में एफआइआर दर्ज नहीं हुई है, तो कई मामलों में मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका. कुछ ऐसे मामले हैं, जिसमें घायलों को परिजन इलाज के लिए इधर-उधर लेकर चले जाते है, जहां इलाज के दौरान घायलों की मौत हो जाती है. पर, परिजन उनका पोस्टमार्टम नहीं कराते हैं और शव का अंतिम संस्कार कर देते हैं. इसके कारण ऐसे मृतकों के परिजनों को हिट एंड रन का लाभ नहीं मिल पाता है. पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिट एंड रन केस में पुलिस पीड़ित को निश्चित तौर पर मुआवजे की योजना के बारे में सूचित करे और इसका लाभ पीड़ित कैसे ले सकते हैं, इसके बारे में उन्हें जानकारी दे.

जब होगी प्राथमिकी दर्ज व पोस्टमार्टम, तभी मिलेगा लाभ

हिट एंड रन के वैसे केस में जरूरी है कि दुर्घटना की समय पर एफआइआर दर्ज करायीजाए. अगर मौत हो चुकी है, तो शव का पोस्टमार्टम जरूर कराएं. कुछ ऐसे मामले हैं, जिसमें घायल की इलाज के दौरान मौत होती है, तो परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के बाद संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हैं. पर, पोस्टमार्टम नहीं होने से इस योजना का लाभ उनको नही मिल पायेगा. कारण, इस योजना का लाभ लेने के लिए प्राथमिकी दर्ज होना चाहिए. मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट व मृत्यु प्रमाण पत्र, जबकि घायल की स्थिति में इंज्यूरी रिपोर्ट का अहम रोल होता है.

हर जागरूक व्यक्ति को देनी चाहिए जानकारी

अपर जिला परिवहन पदाधिकारी साक्षी प्रिया ने बताया कि हिट एंड रन मामले में अब तक 39 मृतक के आश्रितों को मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है, जबकि तीन घायलों को भी इस योजना का लाभ दिलवाया गया है. उन्होंने कहा कि हर जागरूक व्यक्ति इस तरह की दुर्घटना में पीड़ित पक्ष को योजना की जानकारी दे, ताकि योजना का लाभ पीड़ित पक्ष को मिल सके.

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By Sharat Chandra Tripathi

Sharat Chandra Tripathi is a contributor at Prabhat Khabar.

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