प्रभु श्रीराम ने दानवों का संहार कर धर्म की स्थापना की : भगवत शरण

बाल व्यास संत स्वामी भगवत शरण जी महाराज ने राम जन्म का बखान किया. जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गये.

प्रतिनिधि, तारापुर. बाल व्यास संत स्वामी भगवत शरण जी महाराज ने राम जन्म का बखान किया. जिसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गये. वे शनिवार को प्रखंड के देवगांव काली विषहरी मंदिर के प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं को प्रवचन सुना रहे थे. राम जन्म की कथा सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ आरंभ करने की ठानी. निश्चित समय आने पर समस्त अभ्यागतों के साथ राजा दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ तथा अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि को लेकर यज्ञ मंडप में पधारे और यज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया. समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों को यथोचित धन-धान्य, गौ भेंट कर यज्ञ की समाप्ति की गयी. इसके उपरांत राजा दशरथ ने यज्ञ के प्रसाद खीर को अपनी तीनों रानियों में वितरित किया. जिसके बाद तीनों रानियों ने गर्भधारण किया और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ. जिससे संपूर्ण राज्य में उत्सव का माहौल छा गया. इस प्रकार भगवान राम का जन्म अपने चारों भाईयों के साथ हुआ. जिनके द्वारा त्रेता युग जो दानवों के द्वारा ब्राह्मणों का वध किया जाता था, यज्ञ नहीं करने दिया जाता था, वैसे दानवों का भगवान राम एवं उनके चारों भाईयों ने संहार किया और धर्म की स्थापना की. कार्यक्रम को सफल बनाने में उमेश सिंह, दिनेश सिंह, प्रमोद सिंह, जागो मंडल, केदार रजक, लक्ष्मण रजक, सोनू कुमार, निखिल कुमार, मोहन कुमार, गौतम कुमार, राकेश कुमार ने अहम योगदान दिया.

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Published by: Anand kumar

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