उपेक्षा का दंश झेल रहा खड़गपुर सरकारी बस स्टैंड, बदहाल व्यवस्था से यात्री परेशान

Munger News : रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही, लाखों का राजस्व, फिर भी बदहाली की तस्वीर. हवेली खड़गपुर का सरकारी बस स्टैंड आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उपेक्षा का शिकार बना हुआ है.

हवेली खड़गपुर मुंगेर से रतन झा की रिपोर्ट

Munger News : बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधीन खड़गपुर सरकारी बस स्टैंड वर्षों से जर्जर हालत में है. बदहाल भवन, अव्यवस्थित परिसर और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण यात्रियों और चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. नगर पंचायत से नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद भी नागरिक सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है.

जर्जर भवन और बदहाल कार्यालय व्यवस्था

बस स्टैंड का कार्यालय, टिकट काउंटर और अन्य कमरे पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं. बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है, जिससे कर्मचारियों को काम करने में कठिनाई होती है. यात्रियों के बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें खुले में खड़ा रहना पड़ता है.

अतिक्रमण और अव्यवस्था से बढ़ी परेशानी

बस स्टैंड परिसर में अवैध वसूली और अतिक्रमण की समस्या भी गंभीर बनी हुई है. ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा परिसर में अनियंत्रित रूप से वाहन खड़े किए जाने से यात्री आवागमन बाधित होता है. परिसर में गंदगी और बदबू का माहौल आम बात हो गई है.

बारिश में बन जाता है कीचड़ का दलदल

स्थानीय लोगों के अनुसार हल्की बारिश में भी पूरा बस स्टैंड परिसर कीचड़ और सड़ांध से भर जाता है. साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं होने से स्थिति और बिगड़ जाती है. यात्रियों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

फायर सेफ्टी और शौचालय जैसी सुविधाएं नदारद

बस स्टैंड से राजधानी पटना, पूर्णिया, बेगूसराय, खगड़िया, हजारीबाग, देवघर, मुंगेर, जमुई और अमरपुर सहित कई रूटों पर बसों का परिचालन होता है. इसके बावजूद यहां फायर सेफ्टी उपकरण और फर्स्ट एड बॉक्स जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. शौचालय की सुविधा न होने से यात्रियों और कर्मचारियों दोनों को दिक्कत होती है.

हजारों यात्रियों की रोजाना आवाजाही

आंबेडकर चौक स्थित इस बस स्टैंड से प्रतिदिन लगभग 8 हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है. साथ ही करीब डेढ़ से दो सौ ऑटो और ई-रिक्शा भी विभिन्न मार्गों के लिए संचालित होते हैं. इसके बावजूद यात्रियों को न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं.

आमदनी के बावजूद नहीं हुआ विकास

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड से प्रतिदिन लगभग 25 से 30 हजार रुपये तक की आमदनी होती है, बावजूद इसके विकास कार्यों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. लाखों रुपये के राजस्व के बावजूद स्थिति बद से बदतर बनी हुई है.

यात्रियों और कर्मियों में नाराजगी

यात्रियों और कर्मियों का कहना है कि सुविधाओं के अभाव में कामकाज और यात्रा दोनों प्रभावित हो रहे हैं. लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बस स्टैंड के जीर्णोद्धार, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि स्थिति में सुधार हो सके.

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लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

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