न्यायालय के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, मुफस्सिल एसएचओ के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी

निर्धारित समय पर प्रतिवेदन नहीं मिलने पर अदालत ने 8 मई को थानाध्यक्ष से शोकॉज मांगा. इसके बाद भी जवाब नहीं दिए जाने पर 13 मई को जमानती वारंट जारी किया गया.

– एडीजे-7 ने एसपी को दिया कार्रवाई का निर्देश, कहा- न्यायालय मुकदर्शक नहीं बन सकता

मुंगेर

न्यायालय के आदेश की लगातार अनदेखी और चेतावनी के बावजूद अनुपालन नहीं करना मुफस्सिल थानाध्यक्ष को महंगा पड़ गया. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश -7 संतोष कुमार-2 की अदालत ने मुफस्सिल थानाध्यक्ष विपीन कुमार सिंह के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी करते हुए पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है.

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिस का नकारात्मक रवैया और बार-बार न्यायिक आदेशों की अवहेलना स्वीकार्य नहीं है. ऐसे मामलों में न्यायालय मुकदर्शक बनकर नहीं रह सकता और कानून के अनुरूप कार्रवाई की जायेगी. जानकारी के अनुसार, मुफस्सिल थाना कांड संख्या-157/2010 से संबंधित सेशन वाद संख्या-92/2011 की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 9 अप्रैल को मुख्य अभियुक्त मो सत्तार की मृत्यु संबंधी प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था. निर्धारित समय पर प्रतिवेदन नहीं मिलने पर अदालत ने 8 मई को थानाध्यक्ष से शोकॉज मांगा. इसके बाद भी जवाब नहीं दिए जाने पर 13 मई को जमानती वारंट जारी किया गया. इसके बावजूद न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर 20 मई को अदालत ने पुलिस अधीक्षक एवं मुफस्सिल थानाध्यक्ष को आदेश की प्रति भेजते हुए सख्त चेतावनी दी थी. अदालत ने स्पष्ट किया था कि आदेशों की अवहेलना पर कठोर कार्रवाई की जायेगी. इसके बाद भी प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर अदालत ने 1 जून को थानाध्यक्ष के विरुद्ध गैरजमानती वारंट जारी कर दिया.

16 वर्ष पुराने विस्फोटक बरामदगी मामले से जुड़ा है प्रकरण

मामला वर्ष 2010 में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बाकरपुर गांव की है. जहां से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुआ था. तत्कालीन थानाध्यक्ष ने गुप्त सूचना के आधार पर 28 अगस्त 2010 को मो. सत्तार के घर छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान 49 बोरा अमोनियम नाइट्रेट (करीब 2450 किलोग्राम), 100 डेटोनेटर, 2750 मीटर फ्यूज वायर तथा 2725 जिलेटिन स्टिक बरामद की गई थी. इस मामले में मो. सत्तार को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था.

कोतवाली थानाध्यक्ष ने भी नहीं दिया प्रतिवेदन

मुंगेर : न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही का एक और मामला सामने आया है. कोतवाली थाना कांड संख्या-79/2026 में जब्त कार को मुक्त कराने से संबंधित मामले की सुनवाई 13 मई को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अदिति गुप्ता की अदालत में हुई थी.

अदालत ने 15 मई को जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) और कोतवाली थानाध्यक्ष से प्रतिवेदन मांगा था. डीटीओ कार्यालय ने तीन दिनों के भीतर अपना प्रतिवेदन न्यायालय में जमा कर दिया, लेकिन 16 दिन बीत जाने के बाद भी कोतवाली थानाध्यक्ष द्वारा प्रतिवेदन दाखिल नहीं किया गया. जबकि मामले में जब्त वाहन से न तो कोई दुर्घटना हुई थी और न ही किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी. न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में पुलिस की कथित शिथिलता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. कानूनी जानकारों का मानना है कि समय पर प्रतिवेदन नहीं देना न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि इससे आम लोगों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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