वाह रे सिस्टम : बिना रासायनिक विशेषज्ञ व लैब असिस्टेंट के चल रही जिला जल जांच प्रयोगशाला

सुनिश्चित हो सके कि यह पानी पीने के लिए सुरक्षित है अथवा नहीं. लेकिन राज्य का यह पहला जिला जल जांच प्रयोगशाला होगा,

इकरारनामा खत्म होने के बाद भी आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी से लिया जा रहा केमिस्ट का काम, नौ महीने से वेतन के पड़े हैं लाले

मुंगेर.

मुंगेरवासी फ्लोराइड, आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. इसके कारण यहां जिला जल जांच प्रयोगशाला की स्थापना की गयी है. यहां पीएच स्तर, टीडीएस, हार्डनेस, क्लोराइड, फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और बैक्टीरिया जैसे विभिन्न मानकों पर पानी का विश्लेषण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पानी पीने के लिए सुरक्षित है या नहीं, लेकिन राज्य की यह पहली जिला जल जांच प्रयोगशाला होगी, जहां न तो रासायनिक विशेषज्ञ हैं और न ही लैब असिस्टेंट हैं. हद तो यह है कि जिस आउटसोर्सिंग कंपनी का इकरारनामा महीनों पहले मुख्यालय स्तर पर खत्म हो गया है. उसके ही कर्मी को इसका प्रभारी बना कर रखा गया है, जिसे खुद 10 माह से वेतन नहीं मिला है.

अप्रशिक्षित कर्मी के सहारे चल रही प्रयोगशाला

जिला जल जांच प्रयोगशाला पीएचईडी के अधीन संचालित होती है. यहां चार प्रयोगशाला प्रोवैद्यिकी, एक-एक जिला रासायनक, सहायक रासायनक एवं लैब असिस्टेंट के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां सभी पद रिक्त हैं. अब सवाल उठता है कि यह प्रयोगशाला आखिर चल कैसे रही है, तो हम बताते हैं कि यहां इन पदों के लिए मानवबल आपूर्ति की जिम्मेदारी श्रीसर्विंस आउटसोर्सिंग को मिली थी. सूत्रों की मानें, तो कुछ माह पहले ही मुख्यालय स्तर पर उस आउटसोर्सिंग को हटा दिया दिया, लेकिन उनके द्वारा जो कर्मी नियुक्त किये गये थे. उनको यह जानकारी नहीं दी गयी और मुंगेर के जमालपुर में उनका कर्मी केमिस्ट के पद पर काम करता रहा. हद तो यह है कि बिना जांच पड़ताल के ही पीएचईडी ने जमालपुर के उक्त कर्मी को एक माह पहले जिला जल जांच प्रयोगशाला का प्रभार दे दिया है. यहां पर इनके अलावे एक अन्य आउटसोर्सिंग कंपनी से डाटा इंट्री ऑपरेटर हैं. जबकि पीएचईडी से सैंपल केयर टेकर व एक कार्यालय परिचारी हैं. इन चार लोगों के कंधों पर ही यहां पानी जांच की जिम्मेदारी है. केमिस्ट की बात छोड़ दें, तो अन्य कोई प्रशिक्षित नहीं हैं, बावजूद पानी की जांच कर रहे हैं. आखिर बिना प्रशिक्षित कर्मी के पानी की कैसी जांच होती होगी, यह तो विशेषज्ञ ही बता सकते हैं.

केमिस्ट को नौ माह से नहीं मिला है वेतन

जिला जल जांच प्रयोगशाला के प्रभारी केमिस्ट सोनू कुमार को नौ माह से वेतन नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि वे जमालपुर में तैनात थे. एक माह पूर्व यहां बुला लिया गया. वे श्रीसर्विंस आउटसोर्सिंग के कर्मी हैं. फरवरी 2025 से लेकर अब तक उनके वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है. कई बार उक्त एजेंसी को पत्राचार किया, फोन किया, लेकिन कोई सही जवाब नहीं मिला. अब यहां का भी प्रभार दे दिया गया. वे जल जांच नियमित रूप से कर रहे हैं, लेकिन वेतन नहीं मिलने से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनू जिस आउटसोर्सिंग के कर्मी थे. उसे मुख्यालय स्तर से ही हटा दिया गया है. सबकुछ जानते हुए पीएचईडी के अधिकारियों ने सोनू को बिना मुख्यालय के निर्देश के ही रख लिया.

जल जांच में लापरवाही पर नप चुके हैं जेई व केमिस्ट

जिले के हवेली खड़गपुर अनुमंडल के कई क्षेत्रों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा है. वहीं गंगा किनारे बसे क्षेत्रों के पानी में आर्सेनिक की मात्रा मिलती है. आयरन भी कई क्षेत्रों के पानी में मिलता है. विदित हो कि अक्तूबर 2025 में हवेली खड़गपुर अनुमंडल के गंगटा पंचायत के आदिवासी बाहुल्य दुधपनिया में नल जल का फ्लोराइड युक्त पानी पीने से बीमारी फैली थी. इस मामले ने तूल पकड़ा, तो मुख्यालय स्तर से इसकी मॉनिटरिंग की गयी. जांच में पाया गया कि नियमानुसार हर माह नल जल के पानी की जांच होनी थी, जो कई माह से नहीं करायी गयी थी. टीम ने जब पानी की जांच की, तो पानी में फ्लोराइड की मात्रा 4 मिलीग्राम प्रति लीटर पायी गयी, जबकि एक पीपीएम तक मात्रा वाला पानी ही पीने योग्य होता है. इसके बाद मुख्यालय ने आनन-फानन में पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता को स्पष्टीकरण मांगते हुए खड़गपुर के जेई व केमिस्ट को निलंबित कर दिया था. संवेदक तक को डीवार कर दिया गया था. जबकि फ्लोराइड कम करने के लिए मशीनरी लगायी गयी. वर्तमान में दुधपनिया के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.94 मिलीग्राम प्रति लीटर है. अब सवाल उठता है कि जब लापरवाही में इतनी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है. प्रमंडलीय मुख्यालय वाले जिला मुख्यालय में संचालित जिला जल जांच प्रयोगशाला में यह कैसी धांधली हो रही है.

कहते हैं पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता

पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता अभिषेक रंजन ने बताया कि जिला जल जांच प्रयोगशाला में एक केमिस्ट पदस्थापित हैं. हर माह में 200 से 400 पानी के सेंपल की जांच की जा रही है. यहां आम जनता भी जांच कराने पानी लाते हैं. रही बात कर्मियों की कमी और केमिस्ट के मानदेय भुगतान की बात, तो इसके लिए मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है.

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By RANA GAURI SHAN

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