आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज का गाजे-बाजे व घुड़सवार के साथ हुआ भव्य मंगल प्रवेश
मुंगेर. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर श्री 1008 भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के पंचकल्याणक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में मंगल आशीर्वाद प्रदान करने के लिए राष्ट्रसंत एवं अहिंसा तीर्थ प्रणेता आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज रविवार की सुबह मुंगेर पहुंचे. मुनियों के जत्थे के साथ जैसे ही वे पुरबसराय पहुंचे, सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया. गाजे-बाजे और घुड़सवार दल के साथ निकाली गई शोभा यात्रा का नेतृत्व आयोजन संयोजक निर्मल जैन ने किया. शोभा यात्रा में सबसे आगे ध्वजारोही एवं घुड़सवार दल चल रहा था. इसके पीछे कल्याणपरक वाद्य यंत्रों की धुन पर आदिवासी कलाकार लोकनृत्य प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ रहे थे. कोलकाता से पधारे राजेश जैन व मनोज कुमार जैन के पारंपरिक भजन गायन पर रंग-बिरंगे परिधानों में सजे स्त्री-पुरुष श्रद्धालु नृत्य करते हुए डीएवी स्कूल से गांधी चौक, राजीव गांधी चौक होते हुए आजाद चौक तक पहुंचे. वहीं सरस्वती शिशु मंदिर बेकापुर के घोष वादक गुरुदेव की आगवानी करते नजर आए. शहर के चौक-चौराहों को रंगोली व तोरण द्वार से सजाया गया था. पूरा शहर बैनर व झंडों से पट गया था. शोभा यात्रा को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. गुरुदेव के नगर प्रवेश के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय और धार्मिक वातावरण बना रहा. नगरवासियों ने जगह-जगह पूज्य गुरुदेव का भव्य स्वागत किया. बताया गया कि योगनगरी उत्तरवाहिनी गंगा तट मुंगेर में इस अवसर पर कई धार्मिक संस्थाओं के साधु-संत पहले से ही पधार चुके हैं. दिगंबर जैन मुनिराजों का मुंगेर की धरती पर आगमन जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है. पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से पूज्य गुरुदेव की चरण पादुका का प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
