वर्षाजल के संग्रहण व संरक्षण की ओर नहीं जा रहा है ध्यान

मुंगेर : जन जागरण एवं समाज कल्याण समिति जागरण धाम जंगली काली स्थान द्वारा चलाये जा रहे हरीतिमा-संवंर्धन जल संरक्षण अभियान के तहत शनिवार को कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया़ उसकी अध्यक्षता प्रगतिशील किसान सहदेव प्रसाद कंत एवं संचालन जिला गोपालक संघ के मंत्री लाल बहादुर यादव ने किया़ गोष्ठी में नौलक्खा, कंचनगढ़, बांक […]

मुंगेर : जन जागरण एवं समाज कल्याण समिति जागरण धाम जंगली काली स्थान द्वारा चलाये जा रहे हरीतिमा-संवंर्धन जल संरक्षण अभियान के तहत शनिवार को कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया़ उसकी अध्यक्षता प्रगतिशील किसान सहदेव प्रसाद कंत एवं संचालन जिला गोपालक संघ के मंत्री लाल बहादुर यादव ने किया़ गोष्ठी में नौलक्खा, कंचनगढ़, बांक एवं हरपुर के कुल 27 किसानों ने भाग लिया़ मुख्य वक्ता पर्यावरण विद डॉ कपिलदेव यादव ने बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग,

काफी तेजी से नीचे जा रहे जल स्तर, असामयिक तथा अनियंत्रित वर्षा के कारणों पर प्रकाश डाला़ उन्होंने कहा कि कृषक समाज द्वारा जल की खपत अंधाधुन किया जा रहा है और वर्षाजल के संग्रहण व संरक्षण पर उनका ध्यान नहीं जा रहा है़ उन्होंने बताया कि यदि 31 प्रतिशत वर्षाजल को धरती के भीतर जाने दें तो संबंधित क्षेत्र, नहर-पोखर तथा जल श्रोतों में पर्याप्त पानी रह पायेगा़ जिससे खेतों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो सके़

जहां जल संग्रह की स्थिति नहीं बनती हो, वैसे भूमि में मकई, अरहर तथा सूर्यमुखी जैसे पसलों की खेती करनी चाहिए़ कृषि अनुसंधान परिषद नयी दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डॉ मंगला राय ने कहा कि लाभप्रद तथा टिकाऊ खेती का आधार जैविक खेती ही है़

गरमी से नहीं मिल रहा निजात
बारिश नहीं होने से न सिर्फ किसान, बल्कि आम जनों को भी उमस भरी गरमी से निजात नहीं मिल पा रही है़ बाहर निकलना तो दूर, घर के भीतर भी पसीना साथ नहीं छोड़ रही़ पूरा शरीर पसीने की चिपचिपाहट से लथपथ हो जा रहा है़ घर में लगे पखें की हवा भी लोगों को नहीं भा रही़ हाल यह है कि लोग त्वचा रोग के शिकार हुए जा रहे हैं. अत्यधिक पसीने की वजह से खुजली, घमोरी व दाद- खाज से पीड़ित हो रहे हैं.

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