मुंगेर : मिट्टी, पानी और बयार, ये हैं जीने के आधार. लेकिन आज इन्हीं संसाधनों पर खतरा मंडरा रहा है. बाजार ने जहां पानी के परंपरागत संसाधनों को लील लिया.
वहीं दूसरी ओर लोगों की आदत में बोतल बंद पानी के चलन का शुमार करवा कर पानी को पूरी तरीके से बाजार के हवाले कर दिया. तर्क तो यह दिया गया कि प्रदूषित पानी की जगह शुद्ध पानी पीयो. लेकिन आज उसकी साख पर भी बट्टा लग रहा है. मुनाफे की होड़ में सिर्फ जल का क्लोरीकरण बोतल में भर कर लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है.
आज पानी भी शुद्ध नहीं मिल रहा. मुंगेर का एक बड़ा भू-भाग जहां फ्लोराइड प्रभावित गंगा किनारे का इलाका आर्सेनिक से प्रभावित है. दूसरी ओर पानी का बाजारीकरण भी शुद्धता की गारंटी नहीं दे रही. मुंगेर में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 ड्रिंकिंग वाटर के प्लांट चल रहे हैं.
जिसमें शायद ही किसी के पास वैद्य लाइसेंस है. मुंगेर जिले में आज शहर से लेकर गांव तक दर्जनों ड्रिंकिंग वाटर के प्लांट लगे हैं. जहां सील बंद बोतल के साथ ही 20 लीटर के जार में पानी भर कर बेचा जा रहा है. शहर में शादी-विवाह का मौका हो या कोई अन्य पार्टी. सभी जगह 20 लीटर जार का ही उपयोग हो रहा है.
अब तो बैंक, पोस्टऑफिस सहित कई कोरपोरेट कार्यालयों में भी जार का उपयोग हो रहा है. लेकिन इसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है. भू-गर्भीय जल का हो रहा दोहन ड्रिंकिंग वाटर का प्लांट चलाने के लिए भू-गर्भीय जल का जमकर दोहन हो रहा है.
ऐसे संचालक जिला उद्योग केंद्र से महज उद्यमी निबंधन कराकर भू-गर्भीय जल को निकाल रहे हैं. जबकि नियमानुकूल इसके लिए केंद्रीय जल बोर्ड से अनुमति लेनी है. साथ ही बेस्ट वाटर को पुन: जमीन के अंदर डालने का भी प्रबंधन करना है.
ताकि वाटर लेवल बरकरार रहे. लेकिन व्यवसायीकरण के इस व्यवस्था में धड़ल्ले से कानून को ताख पर रख कर पानी का दोहन किया जा रहा है. नहीं है वाटर लैब की व्यवस्था सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुंगेर में 25 ड्रिंकिंग वाटर प्लांट लगे हैं. लेकिन इनमें से किसी के पास वाटर लैब की व्यवस्था नहीं है.
जिससे यह पता चल सके कि पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, मिनरल, ऑक्सीमा की मात्रा कितनी है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता सरयू राम का कहना है कि वाटर प्लांट में लैब का होना जरूरी है. क्योंकि बिना लैब का पानी की शुद्धता का पता नहीं चल सकता. क्या है प्रावधान * वाटर प्लांट चलाने के लिए भू-गर्भीय जल निकालने के लिए केंद्रीय जल बोर्ड से लाइसेंस लेना जरूरी.
वाटर प्लांट में अत्याधुनिक वाटर लैब की व्यवस्था होनी चाहिए.बेस्ट वाटर को भू-गर्भ तक पहुंचाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था होनी चाहिए. * भारतीय मानक संस्थान से आइएसआइ का मार्का लेना अनिवार्य. * पानी की बिक्री के लिए वाणिज्य कर विभाग को निर्धारित टैक्स देने का है प्रावधान.
एसडीओ के आदेश को दिखा रहे ठेगा सुरक्षा मानकों के अनुरूप ड्रिंकिंग वाटर तो तैयार करने एवं बिक्री के लिए अनुमंडल पदाधिकारी डॉ कुंदन कुमार ने सभी थाना प्रभारियों, अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया है
कि बिना आइएसआइ मार्का के बोतल बंद पानी का फर्जी रुप से हो रहे व्यवसाय पर रोक लगाने से संबंधित प्रतिवेदन अविलंब उपलब्ध कराये. गौरतलब है कि एसडीओ ने कई इस संदर्भ में कई पत्र इन लोगों को लिखा गया. लेकिन इसके प्रति इन अधिकारियों की गंभीरता नहीं झलकती है.
मुंगेर में यह मामला उजागर हुआ था कि फर्जी ढंग से आइएसआइ मार्का का लेवल लगाकर पानी बाजार में बेचा जा रहा है. उसके बाद से अनुमंडल अधिकारी के स्तर से आदेश तो निरंतर जारी किये जा रहे हैं लेकिन उसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है.
कहते हैं एसडीओ अनुमंडल पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि बिना आइएसआइ मार्का का बोतल बंद पानी की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है. उन्हें यह सूचना मिली है कि बिना वैद्य लाइसेंस के बोतल बंद पानी का व्यवसाय किया जा रहा है. इस संदर्भ में थानाध्यक्षों व अंचलाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं.
