– सदस्यों की योजनाओं में गली, नाली, पानी और पुस्तकालय शामिल मुंगेरजिला परिषद ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए षष्ठम राज्य वित्त आयोग की राशि से अपने क्षेत्रों में विकास की गंगा बहाने की योजना बनाई है. जिसे लेकर सभी 14 जिप सदस्यों ने 482 योजनाओं के लिए आवेदन कर दिया और जिला परिषद बोर्ड ने भी उन सभी योजनाओं को हरी झंडी दे दी है. जिसके बाद जिला परिषद प्रशासनिक विभाग टेंशन में आ गयी है, क्योंकि जितनी राशि योजनाओं पर खर्च होना है, उतनी राशि विभाग के पास नहीं है, इसलिए जिला परिषद ने योजनाओं का फिजिकल वैरिफिकेशन कराने का निर्णय लिया है और उसके बाद मात्र उन्हीं योजनाओं को चयन होगा जो जनउपयोगी व जनकल्याणकारी होगी और सरकारी जमीन से जुड़ा होगा.
कुल 482 योजनाओं को बोर्ड ने दे दी है हरी झंडी
मिली जानकारी के अनुसार जिला परिषद के अधीन कुल 14 क्षेत्र है. इन क्षेत्रों के सभी सदस्यों से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए योजनाएं मांगी गयी थी. जिन पर षष्ठम राज्य वित्त आयोग की राशि से निर्माण कार्य होना है. सदस्यों ने कुल 482 योजनाओं के लिए योजना क्या है, कहां होना है और उस पर कितनी राशि खर्च होनी है के साथ आवदेन बोर्ड में रखा. बोर्ड ने भी उन सभी 482 योजनाओं को हरी झंडी दे दी है. इन योजनाओं में सामान्य निधि में 187, विकास निधि में 262 और अनुरक्षण मद में 33 योजनाएं शामिल है. बताया गया कि 15 लाख से नीचे की योजनाओं का कार्य विभागीय होगा. जबकि 15 लाख से अधिक राशि खर्च होने वाली योजनाओं का टेंडर प्रक्रिया से होगा.
शौचालय, समरसेबुल व चापानल की है अधिकांश योजनाएं
सदस्यों ने अपने क्षेत्रों में जिन योजनाओं को जनकल्याणकारी करार देते हुए उसके निर्माण को आवश्यक बताया है. उसमें सर्वाधिक गली-नाली के साथ ही पियाऊ व जीपीटी चापानल की योजनाओं है. जबकि कहीं विवाह भवन तो कहीं पुस्तकालय निर्माण की योजना है. इतना ही नहीं सार्वजनिक शौचालय निर्माण की योजना भी शामिल है.
टेंशन में जिप प्रशासन, फिजिकल वैरिफिकेशन के बाद होगा योजना चयन
सामान्वय निधि में 187 योजना को बोर्ड ने पास किया है. जिस पर 24 करोड़ 35 लाख रूपया खर्च होगा. जबकि विकास निधि के 262 योजना पर 27 करोड़ 42 लाख 10 हजार रूपया एवं अनुरक्षण मद के 33 योजना पर 2 करोड़ 43 लाख 50 हजार रूपया खर्च होगा. सूत्रों की मानें तो जितनी राशि खर्च होनी है. उनती राशि जिला परिषद के इस मद में है ही नहीं. जिसके कारण जिप प्रशासन का टेंशन बढ़ गया. इसके लिये सभी योजनाओं का फिजिकल वैरिफिकेशन कराने का निर्णय लिया गया है. जिसमें यह तय किया जायेगा कि सदस्यों ने जो जिन योजनाओं को जनकल्याणकारी व जनउपयोगी बताते हुए निर्माण को जरूरी बताया है. वह वास्तव में जनउपयोगी व जनकल्याणकारी है अथवा नहीं. इतना ही नहीं जहां योजनाओं का निर्माण होना है. वह भूमि सरकारी है अथवा नहीं. इसकी जांच होगी. जनउपयोगी और योजना के लिए सरकारी भूमि होने पर ही योजनाओं का चयन किया जायेगा. जमीन का एनओसी मिलने के बाद ही योजनाओं का कार्य होगा. इसको लेकर जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी ने सभी बीडीओ, सीओ, मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी एवं प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को पत्र भेज कर योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर अनापत्ति पत्र एवं संबंधित योजनाओं का नजरी नक्शा एवं चिह्नित निरीक्षण से संबंधित जीपीएस फोटोग्राफ, प्रस्तावित जमीन सरकारी एवं विवाद रहित होने का प्रतिवेदन, ग्राम पंचायत अथवा पंचायत समिति द्वारा पांच वर्षों से कार्य नहीं कराये जाने संबंधी प्रतिवेदन मांगा है.
कहते हैं मुख्य कार्यपाल पदाधिकारी
जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जिला परिषद बोर्ड से जिन योजनाओं को पास किया गया है. उन सभी योजनाओं का फिजिकल वैरिफिकेशन होगा कि वह योजना जनउपयोगी व जनकल्याणकारी है अथवा नहीं. योजनाओं के लिए जरूरी है कि प्रस्तावित जमीन सरकारी एवं विवाद रहित है या नहीं. इसके बाद ही योजनाओं का चयन किया जायेगा. फिजिकल वैरिफिकेशन का कार्य किया जा रहा है.
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