मुंगेर : कहने को तो सदर अस्पताल में आइसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) की व्यवस्था है. किंतु अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के कारण सदर अस्पताल के आइसीयू की स्थिति काफी बदहाल है. गंभीर हालत में मरीजों को यहां भर्ती तो कर लिया जाता है, किंतु मरीजों को यहां बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराये जाने की कोई गारंटी नहीं है. हाल यह है कि यहां पर भर्ती होने वाले मरीजों को वेंटीलेटर की सुविधा मुहैया कराना तो दूर, मरीजों को ठीक से ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है.
जिसके कारण कई मरीजों की यहां पर जान तक जा चुकी है. रविवार की सुबह उस वक्त एक मरीज के परिजनों ने जम कर हंगामा किया, जिस वक्त अचानक मरीज का ऑक्सीजन सप्लाइ बंद हो गयी और मरीज का दम घुटने लगा. जिसके बाद सुरक्षा गार्डों को मोर्चा संभालना पड़ा.
ऑक्सीजन बंद होते ही घुटने लगा मरीज का दम: शहर के तोपखाना बाजार निवासी 55 वर्षीय सकीना खातून को सांस की बीमारी है तथा उसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी है. रविवार की सुबह 5 बजे उसकी हालत गंभीर होते देख परिजनों ने उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल स्थित आइसीयू में भर्ती कराया.
जहां नर्स मरीज को ऑक्सीजन लगा कर खुद ड्यूटी रूम में सोने चली गयी. कुछ ही देर बाद मरीज को ऑक्सीजन मिलना बंद हो गया और उसका दम घुटने लगा.
सकीना का दम घुटते देख परिजन घबरा गये और जब ऑक्सीन मॉस्क को देखा तो, उससे ऑक्सीजन निकल ही नहीं रहा था. परिजनों ने जब नर्स को इसकी सूचना देने की कोशिश तो आइसीयू में कोई नर्स मौजूद नहीं थी और ड्यूटी रूम का दरवाजा अंदर से लगा हुआ था. इसके बाद मरीज के परिजन हंगामा करने लगे. परिजनों को हंगामा करते देख नर्स घबरा कर जग गयी और फिर उसने मरीज के ऑक्सीन सप्लाइ को ठीक किया. जिसके बाद परिजन शांत हुए.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ योगेंद्र प्रसाद रजक ने बताया कि आइसीयू में मरीज के परिजनों द्वारा हंगामा किये जाने की कोई जानकारी है. जिस समय की यह घटना बतायी जा रही है, उसे समय तो नर्स के सोये रहने का सवाल ही नहीं उठता है. जहां तक चिकित्सक की बात है, जल्द ही एक बैठक कर आइसीयू की बेहतरी के लिए आवश्यक कदम उठाया जायेगा.
बदहाल है आइसीयू की व्यवस्था
सदर अस्पताल में आइसीयू को इस उद्देश्य से स्थापित किया गया है कि जरूरतमंद गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भागलपुर व पटना का चक्कर नहीं लगाना पड़े. किंतु आिसीयू स्थापित होने के बाद भी मुंगेर से मरीजों का भागलपुर व पटना रेफर किये जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. कहने को तो यहां के आइसीयू में मरीजों को भर्ती किया जाता है, किंतु भर्ती मरीज की जरा भी हालत को गंभीर देखा जाता है तो उसे भागलपुर व पटना रेफर कर दिया जाता है. आइसीयू में दिखावे के लिए वेंटीलेटर मशीन तक उपलब्ध है, किंतु आज तक वेंटीलेटर मशीन का उपयोग किया ही नहीं गया. स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आइसीयू में प्रत्येक दो बेड के बीच में ऊंचा पर्दा होना चाहिए. किंतु यहां के आईसीयू में 6 बेड लगे हुए हैं, किंतु एक भी बेड बगल में पर्दा लगा हुआ नहीं है. जबकि यहां हर तरह के बीमारी से ग्रसित मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है. जिससे एक दूसरे मरीजों में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है.
