रक्सौल एयरपोर्ट की उड़ान से पहले बड़ा अपडेट, 454 संरचनाओं पर कार्रवाई की तैयारी

रक्सौल एयरपोर्ट के निर्माण में बड़ी बाधा सामने आई है. 454 ऊंची संरचनाएं उड़ान क्षेत्र में आ रही हैं, जिन पर अब कार्रवाई तेज कर दी गई है. जानिए ये बाधाएं क्या हैं और किन इलाकों में हैं.

Raxaul News: रक्सौल. रक्सौल हवाई अड्डे के संचालन की तैयारियां अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गयी हैं. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की ओर से कराए गए ओएलएस सर्वे की रिपोर्ट के बाद प्रस्तावित एयरपोर्ट के उड़ान क्षेत्र में आने वाली ऊंची संरचनाओं को चिन्हित कर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. सर्वे में भवन, मोबाइल टावर, पानी की टंकियां, मास्क लाइट, बिजली के खंभे समेत करीब 454 संरचनाओं को चिन्हित किया गया है.

454 संरचनाएं उड़ान क्षेत्र में बनीं बाधा

ओएलएस सर्वे के दौरान प्रस्तावित रक्सौल एयरपोर्ट के उड़ान क्षेत्र में आने वाली ऐसी संरचनाओं की पहचान की गयी है, जो विमानों के टेकऑफ, लैंडिंग और सुरक्षित उड़ान में बाधा बन सकती हैं.

चिन्हित संरचनाओं में भवनों के अलावा मोबाइल टावर, पानी की टंकियां, मास्क लाइट, बिजली के खंभे और अन्य ऊंची संरचनाएं शामिल हैं.

नगर परिषद क्षेत्र में 83 संरचनाएं चिन्हित

रक्सौल नगर परिषद क्षेत्र में ओएलएस सर्वे के दौरान कुल 83 संरचनाओं को चिन्हित किया गया है. वार्ड संख्या 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 11, 12, 16 और 21 में 52 भवन, 18 मास्क लाइट, चार पानी की टंकियां, दो मंदिर और दो मस्जिद चिन्हित की गयी हैं.

इसके अलावा रक्सौल रेलवे स्टेशन से जुड़ी पांच संरचनाएं भी निर्धारित उड़ान क्षेत्र में आने की जानकारी सामने आयी है.

मोबाइल टावरों को भी भेजा जाएगा नोटिस

प्रस्तावित एयरपोर्ट के उड़ान क्षेत्र में आने वाले विभिन्न मोबाइल कंपनियों के टावरों को भी अलग से चिन्हित किया गया है. संबंधित कंपनियों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

वहीं चिन्हित संरचनाओं का संबंधित विभागों की ओर से सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

क्या है OLS सर्वे और क्यों है जरूरी?

ओएलएस यानी ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेसेस सर्वे एयरपोर्ट के आसपास उड़ान क्षेत्र में मौजूद संभावित बाधाओं की पहचान के लिए किया जाता है.

इसमें एयरपोर्ट के आसपास निर्धारित ऊंचाई सीमा में आने वाली इमारत, टावर, पानी की टंकी, पेड़ या अन्य संरचनाओं को चिन्हित किया जाता है, ताकि विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान किसी तरह की बाधा न हो.

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में

रक्सौल एयरपोर्ट के लिए बिहार सरकार की ओर से करीब 139 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है. जमीन को कागजी तौर पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपने की तैयारी भी अंतिम चरण में है.

ओएलएस सर्वे की रिपोर्ट के बाद एएआई ने संबंधित विभागों से रिपोर्ट के अनुरूप कार्रवाई का अनुरोध किया है. इसमें नगर परिषद, वन विभाग, बिजली विभाग, भवन निर्माण विभाग समेत अन्य विभाग शामिल हैं.

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लेखक के बारे में

By मनोज कुमार गुप्ता

मनोज कुमार गुप्ता बीते 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट, रेडियो और डिजिटल माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. वर्तमान में भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सीमा सुरक्षा और नेपाल की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं. सामाजिक सरोकारों में गहरी रुचि के साथ वे क्षेत्र की जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं.

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