Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर नवजात और छोटे बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग (शारीरिक विकास मापन) की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. 4 अगस्त 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 28 बाल विकास परियोजनाओं में दर्ज 4,37,484 सक्रिय बच्चों में से महज 1,59,077 बच्चों की ही ग्रोथ मॉनिटरिंग हो सकी है. यह कुल संख्या का मात्र 36.36 प्रतिशत है, जिसका मतलब है कि जिले के 63.64 प्रतिशत बच्चे अब भी इस अनिवार्य पोषण जांच से छूटे हुए हैं.
पताही परियोजना का प्रदर्शन सबसे बेहतर, बंजरिया सबसे पीछे
परियोजनावार समीक्षा में पताही प्रखंड की स्थिति जिले में सबसे बेहतर दर्ज की गई है.
पताही में 16,517 सक्रिय बच्चों में से 9,344 बच्चों की मापी पूरी कर 56.57 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की गई है. इसके अलावा कोटवा में 46.42%, नरकटिया (छौड़ादानो) में 45.95%, चिरैया में 44.70%, चकिया में 43.15% और तुरकौलिया में 42.86% बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग दर्ज की गई है.
दूसरी ओर, बंजरिया बाल विकास परियोजना प्रदर्शन के मामले में सबसे निचले पायदान पर है. बंजरिया में 11,117 सक्रिय बच्चों में से केवल 2,400 बच्चों की मापी हो सकी है, जो महज 21.59 प्रतिशत है. इसके अतिरिक्त केसरिया में 24.31%, फेनहारा में 24.44%, संग्रामपुर में 25.22%, मधुबन में 26.48%, मेहसी में 31.26%, ढाका में 33.08% और मोतिहारी सदर में 33.50% बच्चों की ही मापी हो पाई है.
कुपोषण की पहचान और उपचार के लिए अहम है मापन
ग्रोथ मॉनिटरिंग के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और लंबाई मापकर पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज की जाती है.
इसके माध्यम से सैम (अति कुपोषित) और मैम (मध्यम कुपोषित) बच्चों की समय रहते पहचान की जाती है, ताकि उन्हें आवश्यक चिकित्सीय परामर्श, विशेष पूरक पोषाहार और एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके. ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों का छूटना गंभीर विषय है.
रिपोर्ट में सुधार न होने पर होगी कड़ी कार्रवाई: प्रभारी DPO
आईसीडीएस की प्रभारी डीपीओ निधि कुमारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (सीडीपीओ) को कार्यशैली में सुधार लाने के निर्देश दिए हैं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी सीडीपीओ अपने-अपने क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर शत-प्रतिशत बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग सुनिश्चित कराएं. अगली समीक्षा रिपोर्ट में सुधार नहीं दिखने पर संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध नियमसंगत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
