सावन में मेहंदी लगाने से पहले पढ़ लें यह खबर, केमिकल वाली मेहंदी से बढ़ सकता है त्वचा रोगों का खतरा

बाजार की केमिकल युक्त मेहंदी त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है. आयुर्वेद में मेहंदी के औषधीय गुणों का विशेष महत्व है. जानें क्यों प्राकृतिक मेहंदी ही है बेहतर विकल्प.

Natural Mehndi: सावन, तीज, करवा चौथ, ईद और शादी-विवाह जैसे अवसरों पर मेहंदी लगाने की परंपरा आज भी कायम है. लेकिन अब घरों में तैयार होने वाली प्राकृतिक मेहंदी की जगह बाजार में मिलने वाली केमिकलयुक्त मेहंदी ने ले ली है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी मेहंदी त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है.

विशेषज्ञों के अनुसार जहां तक संभव हो, त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर प्राकृतिक मेहंदी का ही इस्तेमाल करना चाहिए.

कभी हर आंगन में होता था मेहंदी का पौधा

एक समय था जब गांव से लेकर शहर तक लगभग हर घर में मेहंदी का पौधा लगाया जाता था. महिलाएं ताजी पत्तियां तोड़कर उन्हें पीसती थीं और उसी प्राकृतिक मेहंदी से हाथ सजाती थीं.

समय के साथ यह परंपरा कम होती गई और इसकी जगह बाजार में मिलने वाली रेडीमेड मेहंदी ने ले ली.

आयुर्वेद में मेहंदी का है विशेष महत्व

आयुर्वेद में मेहंदी, जिसे मदयन्तिका भी कहा जाता है, औषधीय गुणों से भरपूर मानी गई है.

इसके प्रमुख लाभ बताए गए हैं.

  • शरीर की गर्मी और पित्त दोष को शांत करने में सहायक.
  • रक्त शुद्ध करने में उपयोगी.
  • जलन, सूजन और त्वचा की लालिमा कम करने में मददगार.
  • छोटे घाव भरने में सहायक.
  • खुजली, दाद और कुछ त्वचा रोगों में पारंपरिक रूप से उपयोग.
  • बालों को पोषण देने और समय से पहले सफेद होने की समस्या में सहायक.
  • तलवों की जलन और गर्मी से राहत दिलाने में लाभकारी.

डॉक्टर ने क्या दी सलाह?

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. इंद्रजीत कुमार ने बताया कि प्राकृतिक मेहंदी का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, जबकि बाजार में उपलब्ध कई तरह की केमिकलयुक्त मेहंदी त्वचा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है.

उन्होंने लोगों से अपील की कि सावन और अन्य त्योहारों के दौरान जहां तक संभव हो प्राकृतिक मेहंदी का ही उपयोग करें, ताकि त्वचा संबंधी समस्याओं से बचा जा सके.


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लेखक के बारे में

By Shashi chandra tiwary

शशि चंद्र तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं. साल 2009 में सन्मार्ग हिंदी दैनिक से पत्रकारिता की शुरुआत की और 2011 से लगातार प्रभात खबर के साथ जुड़े हुए हैं. वर्तमान में वह पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन से प्रभात खबर के संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. समसामयिक, अपराध, राजनीति, प्रशासनिक गतिविधि और कृषि जैसे विषयों की पत्रकारिता में विशेष रुचि है.

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