मधुबनी.
मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा शनिवार को विधि विधान से हुई. भगवती के सिद्ध स्थल व पूजा पंडालों में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा के लिए आ रहे हैं. मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को अच्छे स्वास्थ्य, शांति, धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है. पं. पंकज झा शास्त्री के अनुसार पूजा-पाठ ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है. यह मुख्य रूप से शारीरिक, मानसिक और ऊर्जा से जुड़ी है. इसमें स्वच्छता, ध्यान, मंत्रोच्चार और एकाग्रता शामिल है, जो मस्तिष्क और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं.मां कात्यायनी की पूजा व वेलन्योती आज
नवरात्र की षष्ठी तिथि देवी दुर्गा के दिव्य स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा के लिए समर्पित है. रविवार को मां कात्यायनी एवं वेलन्योती की रस्म पूरी की जाएगी. मान्यता के अनुसार देवी कात्यायनी सुनहरे रंग की आभा लिए हुए हैं, इनके दिव्य दर्शन मात्र से साधक को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति नवरात्र में मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा, जप-तप और व्रत करता है, देवी उस पर प्रसन्न होकर उसे रोग, शोक और भय से मुक्ति दिलाती हैं. मां कात्यायनी, महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में उत्पन्न हुई थी. इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है. ऐसी कथा मिलती है कि महर्षि कात्यायन ने संतान प्राप्ति के लिए देवी भगवती की कठोर तपस्या की. इससे प्रसन्न होकर मां ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया. मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का छठा रूप माना जाता है और उनकी पूजा से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जो वैवाहिक जीवन और समृद्धि के लिए शुभ है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
