बिस्फी. विद्यापति स्मारक भवन परिसर में एक दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह का आयोजन किया गया. अध्यक्षता पूर्व मुखिया शालिग्राम यादव ने की. संचालन चंदेश्वर प्रसाद चंद्रेश ने किया. मौके पर परिसर में स्थित विद्यापति की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की गयी. शिक्षाविद शिव शंकर राय, सुभाष चंद्र झा ने कहा कि महाकवि विद्यापति मिथिला मैथिली व मिथिलांचल की मूल संस्कृति को संरक्षित व प्रसारित करने में प्रयत्नशील थे. महाकवि हमारी संस्कृति की अलंकारों में से प्रमुख थे. उनकी रचना आज भी प्रासंगिक है. महाकवि विद्यापति हमारी संस्कृति के आदर्श पुरुष, राष्ट्र के विभूति व लोक भाषाओं के आदि रचनाकार थे. संस्कृति एवं सभ्यता के प्रति जागरूक थे. मां गंगा स्वयं कवि कोकिल विद्यापति की प्यास बुझाने के लिए उनके पास आई थी. विद्यापति के यहां स्वयं देवों के देव महादेव ने चाकरी की थी. महाकवि विद्यापति जैसे व्यक्ति की कृर्ति हमेशा अमर रहेगी. यह क्षेत्र ऐतिहासिक और पौराणिक है. मिथिला विद्वानों का गढ रहा है. बिस्फी ऐतिहासिक पौराणिक व अति प्राचीन धरती पर महाकवि विद्यापति एवं याज्ञवल्क्य, शृंगी ऋषि जैसे कई विभूति पैदा हुए. कार्यक्रम के दौरान गीत संगीतों के साथ कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया. मौके पर डॉ विनोद कुमार सिंह, रवींद्रनाथ शर्मा, ईश्वर चंद्र सिंह, कैलाश यादव, सुशील मिश्रा, मेही लाल महतो, धर्मेंद्र यादव, विष्णु देव यादव, अनिल कुमार यादव उपस्थित थे.
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