प्रतिनिधि, अंधराठाढ़ीशहर की तरह गांव की गली, चौक, चौराहे पर रात के अंधेरे में रोशनी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया सोलर स्ट्रीट लाइट महज कुछ महीने बाद ही काम करना बंद कर दिया है. पंचायतों के लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री सोलर स्ट्रीट लाइट योजना से लगी स्ट्रीट लाइट सिर्फ दिखाने के लिए लगाया गया था. ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में लगाये गये कई सोलर लाइटें नहीं जलती है. जबकि इनका उद्देश्य पूरी रात गांव की गलियों को रोशन रखना था.
लाइट लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब रात में अंधेरा नहीं रहेगा. पर ऐसा नहीं हुआ. सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने में भारी तकनीकी की गडबड़ी हुई है. एक सोलर स्ट्रीट लाइट की सरकारी लागत करीब 30 हजार रुपये बतायी जाती है. लेकिन इतनी बड़ी लागत के बावजूद लाइट का सही तरीके से काम नहीं करना सवाल खड़ा कर रहा है. लोगो का मानना है कि पंचायत में बिना नियमित निगरानी और मेंटेनेंस के यह सरकारी योजना सिर्फ कागज़ों पर चमकती हैं. बीपीआरओ नीतीश कुमार ने कहा कि बंद पड़े सोलर स्ट्रीट लाइट का पंचायत सचिव से लिस्ट मंगा रहे हैं. इधर सोलर लाइट लगाने में तकनीकी कमी की शिकायत नहीं मिली है. ऐजेंसी से सही करवाया जाएगा.
