मधुबनी. राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरा होने पर समस्तीपुर मंडल में शुक्रवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया. विदित हो कि“वंदे मातरम्” गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचा गया था. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जन-जन के भीतर राष्ट्रीय चेतना का संचार किया था. इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक ने कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारे आत्मसम्मान, राष्ट्रप्रेम और एकता का प्रतीक है. हमें गर्व है कि हम इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी है. एडीआरएम ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब भारत का संविधान तैयार किया जा रहा था तब “वंदे मातरम्” के राष्ट्रीय महत्व को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया गया. 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने घोषणा की कि वंदे मातरम् भारत की स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है. उसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और दर्जा प्राप्त होगा. इस प्रकार “वंदे मातरम्” को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुई. उस समय से लेकर आज तक यह गीत देश के हर नागरिक के हृदय में राष्ट्रभक्ति, एकता और सेवा की भावना का प्रतीक बना हुआ है. इस अवसर पर मंडल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में एडीआरएम आलोक कुमार झा, सन्नी सिन्हा, विवेक कुमार, वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी, मंडल के सभी शाखा अधिकारियों, कर्मचारियों व कर्मचारियों के परिवारजनों ने भी सक्रिय भागीदारी की. इस दौरान पूरे वातावरण में देशभक्ति की भावना और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला.
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