Madhubani News : सरकारी स्कूलों में चलेगा स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम

सरकारी स्कूलों में स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम चलाया जायेगा. इसके तहत छात्रों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

मधुबनी.

सरकारी स्कूलों में स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम चलाया जायेगा. इसके तहत छात्रों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से संयुक्त रूप से आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया है. स्कूलों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम भी संचालित किया जायेगा. शिक्षा विभाग के एसीएस ने आयुष्मान भारत के अंतर्गत विद्यालय स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम आधारित सत्रों की कक्षा छह से बारहवीं तक के विद्यालयों में आयोजित करने व सीएएचपी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से मासिक प्रतिवेदन अद्यतन करने का निर्देश दिया है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता पैदा करना और विद्यालय स्तर पर संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है.

बुधवार को होगी गतिविधि :

स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसेडर बनाया जायेगा. इनमें एक शिक्षक व एक शिक्षिका शामिल होगी. इन्हें स्वास्थ्य व्यवहार को बढ़ावा देने और रोगों के रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा. हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर प्रत्येक सप्ताह में एक घंटा रोचक गतिविधियों के माध्यम से सत्र आयोजित करेंगे. प्रत्येक कक्षा से दो नामित छात्र स्वास्थ्य से संबंधित संदेशों को समाज तक पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस मैसेंजर के रूप में काम करेंगे. विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को हेल्थ एंड वेलनेस डे का आयोजन किया जायेगा.

दी जायेगी आयरन की गोली

एनिमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत बच्चों को एनिमिया व इससे होने वाली समस्याओं से बचाने के लिए साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में पांच से नौ वर्ष के छात्रों को प्रत्येक बुधवार के दिन आयरन की गुलाबी गोली का सेवन कराया जाएगा. छात्रों के मिड डे मिल लेने के बाद क्लास टीचर आयरन की गोली खिलायेंगे. वहीं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में दस से उन्नीस वर्ष के किशोर और किशोरियों को सप्ताह में एक बार सुबह प्रार्थना के बाद शिक्षकों के द्वारा आयरन की नीली गोली का सेवन कराया जायेगा. इस योजना के तहत विद्यालय के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के छह से 19 वर्ष तक के छात्रों को लक्षित किया गया है.

दिया जाएगा प्रशिक्षण

आरोग्य दूत प्रशिक्षण के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद ने मापदंड तय किया है. जिसमें कहा गया है कि शिक्षक शिक्षिका को पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा. संचार कौशल क्षमता वाले बच्चों के साथ सरोकार स्थापित करने वाले एवं स्थानीय भाषा पर पकड़ रखने वाले शिक्षकों का ही चयन इसके लिए किया जाएगा. इसके अलावे विज्ञान एवं शारीरिक शिक्षक को प्राथमिकता देने एवं 50 साल से कम उम्र के शिक्षकों का चयन की बात कही गई है. बच्चों को निरोग रखने के लिए सभी स्कूलों में साल में एक बार कैंप लगाकर वहां के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है. इस दौरान कुपोषण या अन्य बीमारी होने पर उसका इलाज भी किया जाता है.

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By GAJENDRA KUMAR

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