Madhubani News: नगर विधायक एवं बिहार विधानसभा की शून्यकाल समिति के सभापति माधव आनंद ने बिहार मंत्रिपरिषद द्वारा मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम स्थित वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल परिसरों में नई सहकारी चीनी मिलों तथा गन्ना उपोत्पाद आधारित उद्योगों की स्वीकृत परियोजना को मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया है. उन्होंने इसे मिथिलांचल के किसानों, युवाओं और आमजन के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताया.
सकरी चीनी मिल रही है क्षेत्र की आर्थिक पहचान
माधव आनंद ने कहा कि सकरी चीनी मिल केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि मधुबनी की आर्थिक पहचान और हजारों किसान परिवारों की आजीविका का आधार रही है. इसके बंद होने से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई थी. उनका कहना है कि मिल के पुनर्जीवन से लाखों लोगों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को नई ऊर्जा मिलेगी.
लगातार उठाते रहे पुनर्जीवन का मुद्दा
विधायक ने कहा कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने सकरी चीनी मिल के पुनर्जीवन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया था. उन्होंने दावा किया कि पिछले आठ महीनों के दौरान गन्ना उद्योग मंत्री से कई बार मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया. साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी विभिन्न अवसरों पर मिलकर सकरी चीनी मिल के पुनर्जीवन की आवश्यकता पर जोर दिया.
विधानसभा में भी उठाया मुद्दा
माधव आनंद ने कहा कि बिहार विधानसभा के प्रत्येक सत्र में उन्होंने सकरी चीनी मिल के साथ-साथ लोहट चीनी मिल के पुनर्जीवन का मुद्दा मजबूती से उठाया. उनके अनुसार, जनहित के मुद्दों को गंभीरता और निरंतरता से उठाने का परिणाम ही है कि सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी है.
सरकार के प्रति जताया आभार
विधायक ने कहा कि यह निर्णय हजारों किसानों, श्रमिकों, युवाओं और उन परिवारों की भावनाओं का सम्मान है, जिन्होंने वर्षों तक सकरी चीनी मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद बनाए रखी. उन्होंने इस निर्णय के लिए बिहार सरकार, गन्ना उद्योग मंत्री तथा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सकरी चीनी मिल की स्थापना की प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो और इसका लाभ जल्द से जल्द किसानों एवं स्थानीय युवाओं तक पहुंचे, इसके लिए वे आगे भी प्रयासरत रहेंगे.
