Sahyog Shivir Madhubani: मधुबनी जिले के बाबूबरही स्थित टीपीसी भवन में आयोजित सहयोग सह जन कल्याण शिविर के दौरान गुरुवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया. शिविर के बीच अचानक भवन की सीलिंग का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर पड़ा. हादसे के समय स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक वहीं मौजूद थे. प्लास्टर का टुकड़ा उनके कंधे को छूते हुए टेबल पर गिरा, जिससे उन्हें मामूली चोट आई. घटना के बाद शिविर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
बताया गया कि टीपीसी भवन में दो दिवसीय सहयोग सह जन कल्याण शिविर का आयोजन किया गया था. विभिन्न विभागों के कर्मियों के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी लोगों को सेवाएं देने के लिए तैनात थी.
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डॉक्टर के टेबल पर गिरा सीलिंग का हिस्सा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार दोपहर अचानक छत से प्लास्टर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा. उस समय डॉ. प्रशांत कुमार अपने टेबल पर बैठकर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सुन रहे थे. सीलिंग का टुकड़ा डॉक्टर के कंधे को छूते हुए सीधे टेबल पर गिरा. हालांकि उन्हें गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन कुछ सेकेंड की चूक बड़ा हादसा बन सकती थी.
दो मिनट पहले तक बैठे थे मरीज
स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना से महज दो मिनट पहले ही दो मरीज चिकित्सीय परामर्श लेकर वहां से उठे थे. यदि प्लास्टर कुछ देर पहले गिरता, तो मरीज भी इसकी चपेट में आ सकते थे. इस घटना के बाद शिविर में मौजूद लोगों के बीच डर और दहशत का माहौल बन गया. कई लोग भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे.
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जांच में सामने आई भवन की जर्जर स्थिति
घटना के बाद अधिकारियों और कर्मियों ने भवन का निरीक्षण किया. जांच में पाया गया कि जिस कमरे में यह हादसा हुआ, वहां छत और दीवारों के कई हिस्से जर्जर अवस्था में हैं.
विशेष रूप से पंखे के आसपास की दीवारों में दरारें और सीलिंग में क्षति दिखाई दी. इससे भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है.
मरम्मत और सुरक्षा जांच की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से टीपीसी भवन की तत्काल मरम्मत कराने और तकनीकी सुरक्षा जांच करवाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों और जनकल्याण शिविरों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ऐसे में जर्जर भवनों में कार्यक्रम आयोजित करना जोखिम भरा हो सकता है. लोगों ने भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए भवन की स्थिति का जल्द आकलन कराने की मांग की है.
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मधुबनी से अवनीश कुमार कर्ण की रिपोर्ट
