मधुबनी. बरन काव्य संगम की आनलाइन गोष्ठी शुभ अंगना प्रोफेसर्स कालोनी मधुबनी में प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल की अध्यक्षता व कवयित्री अंजली किशोर कृति के संचालन में आयोजित हुई. काव्य गोष्ठी का आरंभ मां शारदे को समर्पित कवयित्री पूनम बरनवाल की रचना मां शारदे वर दे से हुई. जो गोष्ठी को आध्यात्मिक बना दिया. वरिष्ठ कवयित्री मंजुला बरनवाल बरन ने अपनी कविताओं समां बांधा. नवादा से ज्योति बरनवाल स्याही में लिखा प्यार उखड़ा, प. बंगाल से मंजू बरनवाल जहां भी रहें सदा ख्याल रहे एक-दूजे का उदात्त चित्त रचना खूब सराही गयी. संतोष बरनवाल की हास्य रचना ””””””””एक कवयित्री के पति”””””””” हास्य रस से ओतप्रोत था. जमुई से सोनी बरनवाल जिंदगी का हिस्सा जिंदगी की वास्तविकता पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल की रचना भैया क्यूं भूल गये तुम अपना गांव रचना सराही गयी. वरिष्ठ साहित्यकार चितरंजन भारती ने गोष्ठी के आयोजन की सराहना करते हुए इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला. अंत में अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. वर्णवाल ने कहा कि बरन काव्य संगम समाज की नई पीढ़ी के लिए सतत प्रयत्नशील है और रहेगा. धन्यवाद ज्ञापन पूनम बरनवाल ने की.
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