मृत्यु के बाद भी दे सकते हैं 8 लोगों को नई जिंदगी, देह-अंग और नेत्रदान को लेकर जागरूकता पर जोर

जागरूकता से बढ़ाएं देहदान, अंगदान और नेत्रदान. एक व्यक्ति के अंगों से 8 जरूरतमंदों को मिल सकती है नई ज़िंदगी. जानें कैसे मृत्यु के 6 घंटे के भीतर भी संभव है नेत्रदान.

Madhubani News: दधीचि देह दान समिति की मधुबनी इकाई की बैठक स्थानीय कार्यालय में हुई. इसमें देहदान, अंगदान और नेत्रदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने पर चर्चा की गयी. वक्ताओं ने कहा कि मृत्यु के बाद भी अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है.

एक व्यक्ति के अंग से आठ लोगों को मिल सकती है जिंदगी

समिति के क्षेत्रीय मंत्री मनमोहन सरावगी ने देहदान, अंगदान और नेत्रदान से जुड़ी विभिन्न भ्रांतियों और आशंकाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अपने अंगों के माध्यम से आठ लोगों को नई जिंदगी दे सकता है.

उन्होंने लोगों से जीते जी रक्तदान और मृत्यु के बाद देहदान व अंगदान के लिए आगे आने की अपील की. कहा कि यह मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है.

मृत्यु के छह घंटे के भीतर हो सकता है नेत्रदान

नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों पर जानकारी देते हुए मनमोहन सरावगी ने बताया कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है. इसके लिए मृतक को अस्पताल या किसी अन्य स्थान पर ले जाने की जरूरत नहीं होती.

आई बैंक के डॉक्टरों की टीम मृतक के घर पहुंचकर करीब 10 मिनट में नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कर सकती है. उन्होंने बताया कि नेत्रदान में पूरी आंख नहीं निकाली जाती, बल्कि केवल कॉर्निया लिया जाता है. इसलिए नेत्रदान के बाद मृतक के चेहरे पर किसी तरह की विकृति दिखाई नहीं देती.

मिथिला के 35 लोगों ने किया कॉर्निया दान

समिति की ओर से बताया गया कि अब तक मिथिला के 35 लोगों ने मरणोपरांत अपना कॉर्निया दान कर मिसाल कायम की है. वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के उदाहरण समाज के दूसरे लोगों को भी अंगदान और नेत्रदान के लिए प्रेरित कर सकते हैं.

जागरूकता से दूर होंगी भ्रांतियां

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. वीके रमन ने कहा कि देहदान, अंगदान और नेत्रदान मानवता की सेवा का बड़ा माध्यम है. इन विषयों को लेकर समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां और संकोच हैं. इन्हें जागरूकता अभियान के माध्यम से दूर करने की जरूरत है.

उन्होंने लोगों से स्वयं आगे आने के साथ परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी देहदान, अंगदान और नेत्रदान के लिए प्रेरित करने की अपील की.

‘मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में ला सकते हैं रोशनी’

समिति के वरीय सदस्य कृष्णा महासेठ ने कहा कि मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी और उम्मीद लाना मानव जीवन की सार्थकता का उदाहरण है. इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.

डॉ. मीनाक्षी ने कहा कि अंगदान ऐसा कार्य है, जिसे इंसान ही कर सकता है. बैठक में आनंद अंकित, राकेश कुमार, मीना सर्राफ, योगेश प्रताप, राजेश कुमार झा, मनोज कुमार, गोपाल मंडल, गजेंद्र प्रसाद, उदय जायसवाल, शक्ति ठाकुर और अवधेश राजपाल समेत कई लोग मौजूद रहे.

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By Awadesh kumar das

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