मधुबनी. राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत जिला स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन बुधवार को संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जी एम ठाकुर की अध्यक्षता हुईं. बैठक में डॉ. जीएम ठाकुर ने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन में जिले में लगातार कार्य किया जा रहा है. इसके बाद भी टीबी मरीजों की संख्या में प्रतिमाह बढ़ोत्तरी हो रही है. विभाग के लिए यह एक चुनौती है. आंकड़े पर गौर करें तो जिले में 31 सितंबर 2025 तक टीबी मरीजों की संख्या 4800 थी. जो 31 अक्टूबर तक बढ़कर 5600 हो गयी है. सीडीओ ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए मजबूती के साथ सभी अधिकारियों को फील्ड स्तर पर जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करना होगा. उपस्थित कर्मियों को आशा से संवेदनशील एवं असुरक्षित जनसंख्या की अद्यतन लाइन लिस्ट नियमित रूप से तैयार करने तथा सूची को प्रखंड स्तर पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. एसटीएस को प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से निजी चिकित्सकों से संपर्क करने का निर्देश दिया. ताकि निजी क्षेत्र में टीबी नियंत्रण गतिविधियों का सशक्त एकीकरण किया जा सके. घर-घर संपर्क, पारिवारिक संपर्कों की पहचान और जांच पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी संभावित टीबी रोगी की पहचान में देरी नहीं हो. टीबी और एचआईवी समन्वय गतिविधियों को और मजबूत किया जाए, ताकि इंफेक्शन वाले मरीजों का उपचार समय पर शुरू हो सके. डेटा रिपोर्टिंग और निक्षय पोर्टल अपडेटिंग में शत-प्रतिशत सटीकता लाई जाए. समुदायिक स्तर पर आइसी गतिविधियां बढ़ाई जाएं ताकि जन-जागरूकता के माध्यम से टीबी रोग के प्रति सामाजिक कलंक समाप्त किया जा सके. डीपीसी पंकज कुमार ने कहा कि टीबी उन्मूलन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने सभी फील्ड अधिकारियों से आह्वान किया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के लक्ष्य को वर्ष 2030 से पहले प्राप्त करने के लिए टीम भावना से कार्य करें. जिले में लगातार हो रहा है टीबी मरीजों में इजाफा सीडीओ ने बताया कि जिले में जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 तक टीबी के 5633 मरीज चिह्नित हुए. इसमें सरकारी संस्थानों से 3305 एवं प्राइवेट संस्थानों से 2328 मरीज चिन्हित किया गया. अक्टूबर माह में टीबी के 550 मरीज चिन्हित हुए, इसमें प्राइवेट में 278 व सरकारी संस्थान में 260 मरीज चिन्हित किया गया. इसमें एमडीआर के 12 मरीजों की पहचान की गई है. एमडीआर मरीजों का उपचार 9 माह से 2 साल तक चलता है. टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग द्वारा यक्ष्मा मरीजों के संपर्क में रहने वाले परिजनों को ट्यूबरक्लोसिस प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट दी जाती है. इसके तहत आइसोनियाजेड एवं रिफापेंटिंन की डोज दी जा रही है. जिले के 16 प्रखंडों में ट्रूनट मशीन से टीबी की जांच की जा रही है. जिले में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण अधिकतर मरीजों द्वारा बीच में ही इलाज एवं नियमित रूप से दवा का सेवन बंद कर देना. इसके लिए विभाग द्वारा निक्षय मित्र योजना की शुरूआत की गई है. इस योजना के तहत मरीजों को गोद लिया जाता है. इसके लिए सरकार और विभाग अपने स्तर से पूरी तरह से प्रयासरत है. अब एक दूसरे को जागरूक होने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि सभी एसटीएस, एसटीएलएल को टीबी मुक्त पंचायत अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष रणनीति के तहत कार्य करने का निर्देश दिया गया. बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी एवं जिला टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जीएम ठाकुर, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि तथा टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े सदस्य उपस्थित थे
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