मधुबनी.
जिले में मोंथा चक्रवात का प्रकोप चौथे दिन भी जारी रहा. बुधवार से शुरू हुई बारिश शनिवार चौथे दिन भी जारी रही. चक्रवात मोंथा कमजोर पड़ने के बावजूद बारिश व ठंड का प्रकोप जारी है. खेतों में लगी धान की फसलें बर्बाद हो गयी. तेज बूंदाबांदी के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गयी. मौसम विभाग से जारी मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अधिकतम तापमान 24 एवं न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. वहीं 6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुरवा हवा चल रही है. मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात मोंथा के कारण कई जिले में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है. किसानों ने कहा कि धान की फसल अब पकने को है और यह बारिश व हवा पकी हुई फसलों के लिए काफी नुकसानदेह साबित हुआ है.सर्दी खांसी बुखार सहित दमा के मरीजों की संख्या बढ़ी
पिछले चार दिनों से हो रही बारिश एवं पछिया हवा के कारण ठंड जनित सर्दी, खांसी, बुखार, दमा व ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. इन मरीजों को अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा आवश्यकतानुसार इलाज व परामर्श दिया जा रहा है. चिकित्सकों की मानें तो ऐसे मौसम में मरीजों को सतर्क रहने की जरूरत है. बढ़ती ठंड के कारण सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों को ठंड से राहत दिलाने का काम शुरू कर दी गई है. ताकि ठंड के मौसम में भर्ती मरीजों को राहत मिल सके. मौसम में तब्दीली एवं पुरवा हवा के कारण ठंड का प्रकोप बढ़ने लगा है. इस क्रम में शनिवार को ओपीडी में आनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से 435 मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया. इसमें मेल ओपीडी में लगभग 150 मरीजों का इलाज किया गया. इसमें सबसे अधिक सर्दी, खांसी, वायरल बुखार, बीपी व दमा के मरीज शामिल रहे.दमा व बीपी के मरीज रखें अपना विशेष ख्याल
सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार ने कहा कि ठंड में दमा व ब्लड प्रेशर के मरीज अत्यधिक प्रभावित होते हैं. इसका मुख्य कारण सांस लेने वाले ग्रंथियों में सांस का अवरुद्ध होना है. इसके अधिकतर शिकार धूम्रपान का अधिक सेवन करने वाले मरीज होते हैं. ठंड के मौसम में ब्लड प्रेशर के मरीज का ब्लड प्रेशर अधिक हो जाता है. इसका मुख्य कारण नसों में सिकुड़न होता है. ऐसे में हार्ट अटैक के मरीज की संख्या में बढ़ोतरी का कारण हर्ट को आवश्यकतानुसार ऑक्सीजन का नहीं मिलना होता है. इन बीमारी से ग्रसित मरीजों को दवा का नियमित सेवन करना चाहिए. ऐसे लोग यदि सुबह की सैर करते हैं, तो उन्हें देर से सैर करना चाहिए. कोल्ड एक्सपोजर से भी ऐसे मरीज को बचना चाहिए. कोल्ड एक्सपोजर के कारण ब्लड प्रेशर के मरीज पैरालाइसिस के शिकार हो सकते हैं. सर्दी के मौसम में सबसे अधिक बचाव कोल्ड एक्स्पोजर से करना है. साथ ही खानपान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.डायरिया से बचाव के लिए करें यह काम
सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डीके झा ने कहा कि डायरिया से बचाव के लिए टीकाकरण से लेकर ओआरएस व जिंक सदर अस्पताल में उपलब्ध है. 0 से 28 दिन के नवजात शिशुओं को सदर अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है. इससे ऊपर आयु के बच्चों को पेडियाट्रिक वार्ड में भर्ती किया जाता है. उन्होंने बताया कि जाड़े के दिनों में बच्चों के लिए सबसे सही ब्रेस्टफीडिंग है. माताओं को अपने बच्चों को बराबर स्तनपान कराते रहना चाहिए. बच्चों को कभी खाली पेट नहीं रखना चाहिए. हड्डी रोग विशेषज्ञ ऑर्थो डा. राजीव रंजन ने कहा, कि ठंड में गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए. इसके साथ ही नियमित व्यायाम करना चाहिए. जोड़ो के दर्द से संबंधित मरीजों को गर्म कपड़े का इस्तेमाल करना चाहिए.बच्चों व बुजुर्ग को पूरे शरीर को हमेशा गर्म कपड़े से ढंककर रखना चाहिए
डॉ. विनय कुमार ने कहा कि ठंड के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के पूरे शरीर को हमेशा गर्म कपड़े से ढंक कर रखना चाहिए. साथ ही समय-समय पर ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर की जांच कराते रहना चाहिए. पीने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए. सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि अस्पताल में दवा की किल्लत नहीं है. ठंड जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है. इसमें सर्दी, खासी, जोड़ों का दर्द एवं बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
