मधुबनी. राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी अमानवीय आदेश फेस रिकागनिशन एटेंडेंस सिस्टम के विरोध में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत एनएचएम कर्मी 22 जुलाई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार व 23 जुलाई को आदेश की प्रतियां अपने-अपने संस्थानों के मुख्यालय पर जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. यह जानकारी बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला मंत्री प्रीति नारायण दास ने दी. श्री दास ने कहा कि एफआरएएस के द्वारा उपस्थिति दर्ज के विरोध में बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के राज्य सामान्य परिषद के सचिव मंडल की आपातकालीन बैठक हुई. बैठक में इस आदेश की विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई. उन्होंने कहा कि एफआरएएस की सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि देहात और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेट काम नहीं करता है. जिसके कारण टेलीमेडिसीन रिपोर्टिंग कार्य समय से संभव नहीं हो पाता है. ऑफलाइन कार्य करने के बाद भी कर्मचारियों को बेवजह पदाधिकारी की द्वारा डांट-फटकार, स्पष्टीकरण सहित वेतन पर रोक आदि का सामना करना पड़ता है. जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं होती है. उन्होंने कहा कि इस नये आदेश के कारण कर्मचारी अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचने के बाद भी नेट नहीं कार्य करने पर अनुपस्थित कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मुख्यालयों में शीत- ताप नियंत्रित कक्ष में नेट कार्य करता है वैसे दूर दराज क्षेत्र में नेट कार्य नहीं करता है. इसे जानते हुए भी सरकार द्वारा इस प्रकार का आदेश निर्गत करना कर्मचारियों को हतोत्साहित करने एवं काम करने के बावजूद वेतन, मानदेय कटौती करने एवं अनुशासनिक कार्रवाई करने की मानसिकता को दर्शाता है. इस आदेश के विरुद्ध राज्य स्वास्थ्य समिति एवं विभाग को लगातार विरोध स्वरूप संलेख भेजा गया है. इसके बाद भी उच्चाधिकारियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है. इस तानाशाही रवैये के कारण बैठक में सर्वसम्मति से लिये गये निर्णयानुसार जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत एनएचएम कर्मी 22 जुलाई से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार व 23 जुलाई को इस आदेश की प्रतियां अपने-अपने संस्थानों के मुख्यालय पर जलाकर विरोध प्रकट करेंगे
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