Madhubani Nagar Nigam: मधुबनी नगर निगम अपनी ही सरकारी होल्डिंग से होल्डिंग टैक्स की वसूली में पिछड़ गया है. निगम के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में चिन्हित 125 सरकारी होल्डिंगों से कुल 67 लाख 82 हजार 532 रुपये की वसूली होनी है. इनमें वित्तीय वर्ष 2025-26 तक का 56 लाख 73 हजार 989 रुपये बकाया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 11 लाख 08 हजार 545 रुपये की वर्तमान मांग है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक इन सरकारी होल्डिंगों से एक रुपये की भी वसूली नहीं हुई है.
125 सरकारी होल्डिंग पर 67.82 लाख रुपये बकाया
नगर निगम क्षेत्र में कुल 125 सरकारी होल्डिंग चिन्हित हैं. इनमें विभिन्न सरकारी कार्यालय, आवास और अन्य विभागीय भवन शामिल हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन होल्डिंगों पर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक 56 लाख 73 हजार 989 रुपये का बकाया है. वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 11 लाख 08 हजार 545 रुपये की वर्तमान मांग निर्धारित की गयी है. इस तरह नगर निगम को सरकारी विभागों से कुल 67 लाख 82 हजार 532 रुपये की वसूली करनी है.
चालू वित्तीय वर्ष में वसूली शून्य
आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही समाप्त होने को है, लेकिन सरकारी होल्डिंग से अब तक कोई वसूली नहीं हुई है. वसूली का प्रतिशत भी शून्य है.
यानी नगर निगम के खाते में सरकारी होल्डिंग टैक्स के मद में एक रुपया भी जमा नहीं हुआ है. इससे निगम की राजस्व वसूली व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत है होल्डिंग टैक्स
होल्डिंग टैक्स नगर निगम की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल है. इसी राजस्व से शहर में साफ-सफाई, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम कराये जाते हैं.
सरकारी विभागों से 67 लाख रुपये से अधिक की राशि लंबित रहने से निगम के राजस्व पर सीधा असर पड़ रहा है. इससे शहर में विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी दबाव बढ़ सकता है.
मेयर ने जतायी नाराजगी
मधुबनी नगर निगम के मेयर अरुण राय ने सरकारी होल्डिंग से वसूली शून्य रहने पर नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और 125 सरकारी होल्डिंगों से एक रुपये की भी वसूली नहीं होना गंभीर विषय है.
मेयर ने कहा कि कुल मांग 67 लाख 82 हजार रुपये से अधिक है, जो नगर निगम के राजस्व का बड़ा हिस्सा है. सरकारी विभागों के लिए भी नगर निगम को होल्डिंग टैक्स देना अनिवार्य है और इसमें किसी तरह की छूट नहीं है.
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