मधुबनी. स्वास्थ्य विभाग के तमाम कोशिशों के बाद भी चिकित्सकों व कर्मियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रहा है. सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने दिन व शाम में ही नहीं बल्कि रात में भी स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं. इसी क्रम में सिविल सर्जन ने 24 अक्टूबर को संध्या पाली में सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान आर्थोपेडिक ओपीडी, आई ओपीडी, मेडिकल ओपीडी, अल्ट्रासाउंड, कुत्ता काटने की सूई देने वाले ओपीडी, आईसीयू सहित विभिन्न विभागों में चिकित्सक एवं कर्मी अनुपस्थित पाए गए. सिविल सर्जन ने इस संबंध में प्रभारी उपाधीक्षक को अनुपस्थित चिकित्सकों एवं कर्मियों से अपने मंतव्य के साथ स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. समय से संतोषप्रद जवाब प्राप्त नहीं होने पर संबंधित चिकित्सकों के अनुपस्थित अवधि का वेतन अवरुद्ध कर उनके विरुद्ध यथोचित कार्रवाई की जाएगी. सिविल सर्जन ने कहा कि संध्याकालीन ओपीडी में चिकित्सकों की अनुपस्थिति प्रभारी उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक की शिथिलता को दर्शाता है. प्रभारी उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक को पूर्व में दिए गए निर्देश के आलोक में प्रसव कक्ष एवं स्त्री रोग ओपीडी में अलग-अलग चिकित्सकों को ड्यूटी लगाने का निर्देश दिया गया था. जिसका अनुपालन नहीं किया गया. आदेश का अनुपालन नहीं किये जाने के कारण प्रभारी उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक सदर अस्पताल को इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण पत्र प्राप्ति के दो दिनों के अंदर देने का निर्देश दिया है. सिविल सर्जन ने कहा कि स्पष्टीकरण संतोषप्रद नहीं पाये जाने पर संबंधित चिकित्सक एवं कर्मियों क विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के साथ ही अनुपस्थित अवधि के वेतन पर रोक लगाई जाएगी. चिकित्सक एवं कर्मी रहे अनुपस्थित सिविल सर्जन ने 24 अक्टूबर की रात सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया. औचक निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल के आर्थोपेडिक ओपीडी में डॉ. आनंद मोहन की ड्यूटी निर्धारित थी. निरीक्षण के क्रम में वह अपने कर्तव्य से अनुपस्थित पाए गए. उनके स्थान पर डॉक्टर विक्रम सिंह रैगर ड्यूटी कर रहे थे. ओपीडी के कुत्ता काटने की सुई देना निर्धारित है. कक्ष बंद था और कोई कर्मी उपस्थित नहीं था. सर्जिकल ऑर्थोपेडिक बंद था. स्त्री एवं प्रसुति ओपीडी में डॉ. विद्या पल अपने ड्यूटी से जा रही थी. निरीक्षण होते देखकर उपस्थित हुई. अल्ट्रासाउंड कक्ष, शिशु रोग ओपीडी एवं जनरल मेडिसिन ओपीडी भी बंद था. चिकित्सक एवं कर्मी उपस्थित नहीं थे. पैथोलॉजी कक्ष में केवल एक लैब टेक्नीशियन उपस्थित था. एसएनसीयू में डॉक्टर अरविंद कुमार यादव अनुपस्थित थे. रक्त अधिकोष में कर्मी उपस्थित था, चिकित्सक अनुपस्थित था. प्रसव कक्ष में भी डॉक्टर विद्या पॉल उपस्थित थी. एक ही चिकित्सक को प्रसव कक्ष में और ओपीडी में भी ड्यूटी लगाई गई है. आई ओपीडी में चिकित्सक अनुपस्थित थे. नेत्र सहायक एवं फिजियोथैरेपिस्ट उपस्थित थे गए आईसीयू में चिकित्सक अनुपस्थित थे. सीएस ने कहा कि निरीक्षण में अधिकांश चिकित्सक अपने कर्तव्य से अनाधिकृत रूप से उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि चिकित्सकों द्वारा संध्याकालीन ओपीडी कार्य में अभिरुचि नहीं ली जाती है, जो बिहार सरकारी सेवक नियमावली 1976 के प्रतिकूल है. इस संबंध में प्रभारी उपाधीक्षक सदर अस्पताल डॉक्टर राजीव रंजन को निर्देशित किया जाता है कि वह अनुपस्थित पाए गए चिकित्सकों एवं कर्मियों को चिन्हित करते हुए उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर अपने स्पष्ट मंतव्य के साथ दो दिनों के अंदर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. समय एवं संतोषप्रद जवाब प्राप्त नहीं होने पर संबंधित चिकित्सकों के अनुपस्थित आबादी का वेतन अवरुद्ध कर उनके विरुद्ध यथोचित कार्रवाई की जाएगी. संध्याकालीन ओपीडी में चिकित्सकों की अनुपस्थिति प्रभारी उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक की शिथिलता का को दर्शाता है साथ ही प्रभारी उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक सदर अस्पताल को पूर्व में दिए गए निर्देश के आलोक में प्रसव कक्ष एवं स्त्री रोग ओपीडी में अलग-अलग चिकित्सकों को ड्यूटी लगाने के लिए निर्देशित किया गया था. जिसका अनुपालन नहीं किया गया है. लिहाजा प्रभारी उपाधीक्षक एवं अस्पताल प्रबंधक सदर अस्पताल को इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण पत्र प्राप्ति के दो दिनों के अंदर समर्पित करने का निर्देश दिया है. .
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