इनपुट- कार्तिक कुमार
मधुबनी पेंटिंग: मिथिला पेंटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में मधुबनी में एक अनूठी पहल शुरू हुई है. सौराठ स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में करीब 200 कलाकार और छात्र-छात्राएं मिलकर रामचरितमानस पर आधारित विशाल मिथिला पेंटिंग तैयार कर रहे हैं. दावा है कि यह दुनिया की सबसे लंबी मिथिला पेंटिंग हो सकती है. 15 अगस्त को पेंटिंग की प्रदर्शनी के साथ इसकी लंबाई की माप की जाएगी और विश्व रिकॉर्ड के लिए प्रमाणन की प्रक्रिया होगी.
एक कैनवास पर दिखेगी सीता-राम की जीवनगाथा
जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा के निर्देश पर तैयार की जा रही इस पेंटिंग में मिथिला की पुत्री माता सीता और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े 51 प्रमुख प्रसंगों को उकेरा जा रहा है. कलाकार पारंपरिक मिथिला चित्रकला शैली में इन प्रसंगों को कैनवास पर जीवंत रूप दे रहे हैं.
मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने बताया कि इसमें भगवान श्रीराम के बाल्यकाल से लेकर धनुष यज्ञ, सीता-राम स्वयंवर, वनवास, केवट प्रसंग, जामवंत-हनुमंत संवाद और लंका दहन सहित रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल किए जा रहे हैं.
10 से 15 अगस्त तक चलेगा चित्रकारी का काम
निदेशक के अनुसार विशाल पेंटिंग का निर्माण कार्य 10 अगस्त से शुरू हुआ है, जो 15 अगस्त तक चलेगा. इसके लिए विशेष रूप से इंदौर से कैनवास, कूची और रंग मंगाए गए हैं. संस्थान के करीब 200 छात्र-छात्राएं और कलाकार इस सामूहिक कला परियोजना में जुटे हैं.
इतने बड़े स्तर पर पेंटिंग तैयार करने को लेकर कलाकारों और प्रशिक्षकों में खासा उत्साह है. सभी कलाकार पूरी तल्लीनता के साथ रामायण के प्रसंगों को मिथिला की पारंपरिक शैली में कैनवास पर उतार रहे हैं.
पद्मश्री कलाकारों के निर्देशन में तैयार हो रही पेंटिंग
विशाल पेंटिंग को अंतिम रूप देने में संस्थान के अनुभवी कलाकार और प्रशिक्षक भी मार्गदर्शन कर रहे हैं. पद्मश्री से सम्मानित मिथिला चित्रकला की प्रसिद्ध कलाकार बौआ देवी और दुलारी देवी के साथ शिवम पासवान, डॉ. रानी झा, संजय जायसवाल और प्रतीक प्रभाकर कलाकारों को दिशा दे रहे हैं.
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इस सामूहिक प्रयास में अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन से पारंपरिक मिथिला शैली और रामायण के प्रसंगों को एक साथ प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है.
15 अगस्त को होगी प्रदर्शनी, रिकॉर्ड के लिए माप
मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने बताया कि 15 अगस्त को इस विशाल पेंटिंग को मिथिला चित्रकला के म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा. इसी दिन वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के अधिकारी भी संस्थान पहुंचेंगे.
अधिकारी पेंटिंग की लंबाई की माप करेंगे. निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने पर इसे विश्व रिकॉर्ड के लिए प्रमाणित किया जाएगा. फिलहाल कलाकारों और अधिकारियों की नजर 15 अगस्त पर टिकी है.
मिथिला की कला को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश
इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक विशाल पेंटिंग तैयार करना नहीं, बल्कि मिथिला की समृद्ध कला परंपरा और राम-सीता की सांस्कृतिक विरासत को एक साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करना भी है. एक ही कैनवास पर करीब 200 कलाकारों द्वारा 51 प्रसंगों को उकेरना अपने आप में अनूठा प्रयास है.
कलाकारों का कहना है कि इस पेंटिंग के माध्यम से मिथिला की पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा. साथ ही माता सीता और भगवान श्रीराम की जीवनगाथा को मिथिला की कला शैली में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकेगा.
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