Madhubani News: मिथिलांचल के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक स्थल बलिराजगढ़ में गुरुवार, 28 मई को पुरातत्वविदों (Archaeologists) के एक उच्चस्तरीय दल ने दौरा किया. प्रखंड मुख्यालय बाबूबरही से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर विशेषज्ञों ने घंटों अवलोकन किया. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय (Nalanda International University) के शोधार्थियों को उत्खनन (Excavation) की व्यावहारिक तकनीकों और प्रलेखन (Documentation) की आधुनिक विधियों से रूबरू कराना था.
इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए वलिराजगढ़ से जुड़ी यह रिपोर्ट बेहद ज्ञानवर्धक है.
पुरातत्वविदों के दल में शामिल प्रमुख विशेषज्ञ
इस विशेष शैक्षणिक और पुरातात्विक दौरे में देश और राज्य के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल रहे, जिनकी सूची नीचे दी गई है:
| विशेषज्ञ का नाम | पद एवं संबद्ध संस्थान |
|---|---|
| डॉ. जलज कुमार तिवारी | वरिष्ठ पुरातत्वविद, एएसआई (ASI) भोपाल |
| डॉ. शिव कुमार मिश्र | को-कन्वेनर, इनटेक (INTACH) बिहार स्टेट |
| ललित कुमार सिंह | उपनिदेशक, बापू टावर पटना |
| रामशरण अग्रवाल | अध्यक्ष, लखमदेई बचाओ अभियान समिति सीतामढ़ी |
नोट: इस दल के साथ नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के करीब आधा दर्जन शोधार्थी छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे.
शोधार्थियों को सिखाई गईं उत्खनन की व्यावहारिक बारीकियां
दौरे के दौरान विशेषज्ञों ने फील्ड पर ही शोधार्थी छात्र-छात्राओं की क्लास ली और उन्हें पुरातत्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक इनपुट्स दिए:
- उत्खनन और प्रलेखन (Documentation): एएसआई भोपाल के वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. जलज कुमार तिवारी ने छात्रों को पुरातात्विक उत्खनन की व्यावहारिक बारीकियों से अवगत कराया. उन्होंने समुचित प्रलेखन, फोटोग्राफी, वैज्ञानिक माप (Measurement), लेयर निर्धारण (Stratigraphy) और जमीन से निकलने वाले पुरावशेषों (Antiquities) के सुरक्षित रखरखाव के बारे में विस्तार से समझाया. इसके साथ ही उन्होंने छात्रों के शोध से जुड़े सवालों के सारगर्भित जवाब भी दिए.
- आधुनिक तकनीकों का प्रयोग: बापू टावर पटना के उपनिदेशक ललित कुमार सिंह ने आधुनिक समय में उत्खनन के दौरान अपनाई जाने वाली अत्याधुनिक और डिजिटल तकनीकों की जानकारी दी, जिससे ऐतिहासिक साक्ष्यों को बिना नुकसान पहुंचाए सहेजा जा सके.
- वैशाली और बौद्ध साहित्य का अध्ययन: लखमदेई बचाओ अभियान समिति के अध्यक्ष रामशरण अग्रवाल ने शोधार्थियों को अपने रिसर्च को समृद्ध करने के लिए बौद्ध साहित्य का गहन अध्ययन करने की सलाह दी. इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को वैशाली के पुरातात्विक स्थलों से प्राप्त पुरावशेषों का बारीकी से अवलोकन करने का सुझाव दिया.
- उत्खनन के लिए प्रयास: इनटेक बिहार के को-कन्वेनर डॉ. शिव कुमार मिश्र ने इस दौरान बताया कि रामशरण अग्रवाल द्वारा बलिराजगढ़ के इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल के बड़े पैमाने पर उत्खनन के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से लगातार पत्राचार किया जा रहा है, ताकि इस स्थल का पूरा इतिहास दुनिया के सामने आ सके.
