मधुबनी से के के पुट्टी की रिपोर्ट
Madhubani News: स्वचालित कविगोष्ठी के मासिक आयोजन के तहत प्रो. जेपी सिंह के आवासीय परिसर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह गोष्ठी प्रो. सिंह के निर्देशन, रेवती रमण झा की अध्यक्षता और उदय जायसवाल के कुशल संचालन में संपन्न हुई. वहीं, प्रस्तुत रचनाओं की समीक्षा डॉ. रामदयाल यादव द्वारा की गई. गोष्ठी में एक दर्जन से अधिक रचनाकारों ने अपनी बेहतरीन कृतियों की प्रस्तुति दी.
मैथिली भाषा को लेकर बड़ी उपलब्धि पर हर्ष
गोष्ठी का संचालन करते हुए उदय जायसवाल ने सभी साहित्यकारों का स्वागत किया. उन्होंने मैथिली भाषा को सीबीएसई पाठ्यक्रम में सम्मिलित किए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए इसे मिथिला के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया. इसके बाद अजय कुमार सिंह ने ‘मेरा भारत देश महान’ रचना प्रस्तुत कर गोष्ठी की शुरुआत की, जिसमें आजादी के बाद की जनसमस्याओं की झलक दिखी.
रचनाओं के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर प्रहार
वेदानंद साह की लघुकथा ‘पुस्तक की सुगंध’ ने सोशल मीडिया के दौर में किताबों के प्रति लगाव को दिखाया. अनुपम झा की देशभक्ति रचना ‘जय-जय भारती भारत माता’ को खूब सराहना मिली. प्रो. जेपी सिंह की रचना ‘आग सेकने के लिए है घर जलाने के लिए नही’ और प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल की ‘हमारा कहा है हिंदुस्तान’ ने देश में नैतिक मूल्यों के क्षरण पर ध्यान आकृष्ट कराया.
साहित्यिक विचारों का हुआ आदान-प्रदान
अध्यक्षीय संबोधन में रेवती रमण झा ने कहा कि इस गोष्ठी के माध्यम से रचनाकारों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है और यह निरंतरता बनी रहनी चाहिए. अंत में सभी ने महान शायर स्व. बशीर बद्र को श्रद्धांजलि दी. धन्यवाद ज्ञापन दयानन्द झा की ओर से किया गया.
