मधुबनी से केके पुट्टी की रिपोर्ट
Madhubani News: मधुबनी में करीब ढाई दशक बाद रंगमंच की रौनक फिर से देखने को मिली. शहर के नगर भवन में आयोजित दो दिवसीय रंग महोत्सव ने न सिर्फ पुराने रंगकर्मियों की यादें ताजा कर दीं, बल्कि नई पीढ़ी को भी नाट्य कला से जोड़ने का काम किया. इस आयोजन में बड़ी संख्या में नाटक प्रेमी शामिल हुए और मंचीय प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया.
25 साल बाद रंगमंच की वापसी
एक समय मधुबनी का रंगमंच काफी सक्रिय माना जाता था, लेकिन समय के साथ इसकी गतिविधियां कम होती चली गईं. ऐसे में लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान की पहल पर आयोजित इस रंग महोत्सव ने शहर में फिर से नाट्य संस्कृति को जीवंत करने का प्रयास किया. लंबे अंतराल के बाद मंचित नाटकों को देखकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला.
महेंद्र मलंगिया को समर्पित रहा आयोजन
महोत्सव का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध नाटककार महेंद्र मलंगिया रहे. हाल ही में उनके 35 नाटकों का मंचन दिल्ली में विभिन्न नाट्य संस्थाओं द्वारा किया गया था. इस उपलब्धि के कारण उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ गिनीज बुक में भी दर्ज हुआ है. इसी उपलब्धि के सम्मान में मधुबनी में यह विशेष रंग महोत्सव आयोजित किया गया.
दो दिनों तक जुटे प्रशासनिक और सांस्कृतिक जगत के लोग
लोकहित रंगपीठ सेवा संस्थान के सचिव प्रो. महेंद्र लाल कर्ण ने बताया कि महोत्सव के दोनों दिनों में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कला-संस्कृति से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान रंगमंच और संस्कृति के संरक्षण पर भी चर्चा की गई.
कलाकारों का हुआ सम्मान
महोत्सव के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कलाकारों और रंगकर्मियों को ‘रंग सम्मान’ से सम्मानित किया गया. दो दिनों में कई वरिष्ठ और युवा कलाकारों को मंच पर सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की गई. आयोजन ने यह संदेश दिया कि मधुबनी की सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है और उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है.
