Madhubani News: मिथिलांचल की संस्कृति में खान-पान और मेहमानों का स्वागत एक बेहद खास स्थान रखता है. सालों से चले आ रहे इस पारंपरिक शौक के आगे महंगाई या कोई भी कठिनाई मायने नहीं रखती. शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ या बहू के घर आने पर होने वाले प्रीति भोज (भरफोरी) में लोग जितने चाव से मांस-मछली खाते हैं, उतने ही शौकीन वे मीठे के भी हैं. यहां के लोग जितने दिल खोलकर खाते हैं, मौका मिलने पर उतने ही खुले दिल से खिलाते भी हैं.
बाराती के स्वागत का मेनू: प्रति व्यक्ति 750 ग्राम मांस और एक क्विंटल मछली का हिसाब
मिथिलांचल में, खासकर ब्राह्मणों की बारात के स्वागत के लिए बेटी वाले के यहां व्यापक तैयारी की जाती है. बारात के भोजन का मेनू तय करते समय प्रति व्यक्ति कम से कम 750 ग्राम मांस या एक किलो मछली का हिसाब रखा जाता है. यानी अगर 100 बाराती आ रहे हैं, तो कम से कम 75 किलो मांस या एक क्विंटल मछली का बनना बिल्कुल लाजिमी है. इसके अलावा बारात के दरवाजे पर पहुंचते ही ड्राई फ्रूट्स, कोल्ड ड्रिंक्स, पांच प्रकार की मिठाइयों का पैकेट, चाय-पान और फिर मुख्य भोजन में 11 तरह की सब्जी, पूरी और दही-रसगुल्ला परोसा जाता है.
भोजनचट्टी पर मुकाबला: 100 रसगुल्ला खाना आज भी है आम बात
महानगरों में जहां बुफे सिस्टम में लोग दो-चार रसगुल्लों में सिमट जाते हैं, वहीं मिथिलांचल के गांवों में आज भी जमीन पर ‘भोजनचट्टी’ लगाकर पत्तल पर खाना परोसा जाता है. लोग बैठकर आराम से दो घंटे तक हास्य-विनोद और एक-दूसरे को ललकारते हुए खाते-खिलाते हैं. यहां लगभग हर गांव में 50 से 100 रसगुल्ला तक खाने वाले दर्जनों लोग आसानी से मिल जाते हैं. खाने के इसी अनूठे शौक को लेकर मिथिला में बुआरी और इचना जैसी मछलियों पर कई प्रसिद्ध कहावतें भी सदियों से लोक संस्कृति का हिस्सा बनी हुई हैं.
मधुंबनी से रमण कुमार मिश्र की रिपोर्ट
