अनिल कुमार झा मधुबनी
Madhubani News: दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की ओर लौटने वाले रेल यात्रियों के लिए फिलहाल ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना बड़ी चुनौती बना हुआ है . रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता सेनानी, शहीद, सरयू यमुना, गरीब रथ, बिहार संपर्क क्रांति और पवन एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में जुलाई के पहले और तीसरे सप्ताह से ही अब कंफर्म टिकट मिलने की उम्मीद है . इन सभी वीआईपी ट्रेनों में 8 जुलाई के बाद ही सीटों की उपलब्धता सामान्य हो सकेगी .
जानिए किस ट्रेन में कब से मिलेगी कंफर्म सीट
- स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस: जयनगर से नई दिल्ली जाने वाली इस ट्रेन के थर्ड एसी में 14 जुलाई और स्लीपर में 16 जुलाई के बाद कंफर्म टिकट उपलब्ध है.वहीं नई दिल्ली से आने वाले यात्रियों को थर्ड एसी में 5 और स्लीपर में 7 जुलाई के बाद जगह मिलेगी
- बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस: नई दिल्ली से दरभंगा आने वाली ट्रेन के थर्ड एसी में 7 व स्लीपर में 14 जुलाई से टिकट मिलेगा . वहीं दरभंगा से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन के थर्ड एसी में 14 व स्लीपर में 17 जुलाई के बाद ही नो-रूम की स्थिति खत्म होगी .
- शहीद व सरयू यमुना एक्सप्रेस: अमृतसर से जयनगर आने वाली शहीद एक्सप्रेस के एसी-3 इकोनॉमी में 2 व स्लीपर में 7 जुलाई के बाद टिकट मिलेगा . वापसी में जयनगर से अमृतसर जाने वाली ट्रेन में 16 जुलाई के बाद ही बर्थ खाली हैं . सरयू यमुना में अमृतसर से आने के लिए 8 जुलाई और जयनगर से जाने के लिए 19 जुलाई के बाद स्लीपर में कंफर्म टिकट मिलेगा .
- पवन व गरीब रथ: मुंबई से जयनगर आने वाली पवन एक्सप्रेस में 7 व 14 जुलाई और जयनगर से मुंबई जाने के लिए स्लीपर में 22 जुलाई से टिकट मिलेगा . आनंद विहार-जयनगर गरीब रथ में 14 जुलाई और जयनगर-आनंद विहार गरीब रथ में 20 जुलाई के बाद सीट उपलब्ध है .
स्लीपर कोच कम होने से मजदूर वर्ग बेहाल, तत्काल में एक-दो टिकट ही संभव
रेलवे यात्रियों को पारदर्शिता का भरोसा दे रही है, लेकिन हकीकत यह है कि अहले सुबह से पीआरएस काउंटर पर लंबी कतारों में लगने के बाद भी तत्काल कोटे से बमुश्किल एक या दो टिकट ही निकल पाते हैं.यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि रेलवे ने राजस्व बढ़ाने के लिए स्लीपर कोचों की संख्या भारी कटौती कर दी है.उदाहरण के लिए, शहीद और सरयू यमुना एक्सप्रेस के 17 कोचों में से 15 कोच एसी (10 थर्ड एसी इकोनॉमी, 4 सेकेंड एसी, 1 कंबाइंड एसी) कर दिए गए हैं और महज दो कोच स्लीपर के बचे हैं.स्वतंत्रता सेनानी और बिहार संपर्क क्रांति में भी 4-4 स्लीपर बोगियां कम करके 6-6 थर्ड एसी कोच बढ़ा दिए गए हैं.इसके कारण सामान्य और मजदूर वर्ग के यात्रियों को विवश होकर स्लीपर से ढाई से तीन गुना अधिक किराया देकर थर्ड एसी में सफर करना पड़ रहा है.जहाँ मधुबनी से दिल्ली का स्लीपर किराया 575 से 640 रुपये है, वहीं थर्ड एसी के लिए 1505 से 1605 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं .
मधुबनी स्टेशन से प्रतिदिन 4 लाख रुपये से अधिक का राजस्व
टिकटों की भारी मारामारी के बीच मधुबनी रेलवे स्टेशन के वाणिज्य कार्यालय को बंपर राजस्व की प्राप्ति हो रही है.वर्तमान में पीआरएस (आरक्षित) और यूटीएस (अनारक्षित) काउंटरों से प्रतिदिन 4 लाख रुपये से अधिक का राजस्व मिल रहा है.इसमें आरक्षित टिकटों से रोजाना 2 लाख रुपये और अनारक्षित से लगभग 1.75 लाख रुपये की कमाई हो रही है . काउंटर पर प्रतिदिन 200 से 225 आरक्षित टिकट और यूटीएस से 3000 से 3500 साधारण टिकटों की बिक्री हो रही है . इससे पूर्व मार्च महीने में पीआरएस से लगभग 80 लाख और यूटीएस से 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था .
