Madhubani News: बिहार राज्य किसान सभा, बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन और अखिल भारतीय नौजवान संघ के संयुक्त राज्यव्यापी आह्वान पर सोमवार को समाहरणालय के सामने विशाल प्रदर्शन किया गया. टाउन क्लब मैदान मधुबनी से सैकड़ों किसान, मजदूर और नौजवानों का जत्था जुलूस के साथ निकला. शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए यह आक्रोश मार्च समाहरणालय पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और बिहार सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
बाढ़-सुखाड़ के स्थाई समाधान और न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान सभा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य मिथिलेश झा, मनोज मिश्र और राकेश कुमार पांडेय ने कहा कि सरकार किसान-मजदूर विरोधी नीतियां अपना रही है. प्रदर्शनकारियों ने बाढ़ और सुखाड़ के स्थाई समाधान के लिए बहुउद्देशीय हाई डैम निर्माण और सिंचाई परियोजनाओं को चालू करने की मांग की. इसके अलावा, किसानों के उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कानून बनाने, फसल बीमा योजना लागू करने और बढ़ते पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्यों पर रोक लगाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई.
रोजगार, न्यूनतम मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते पर दिया जोर
यूनियन के नेताओं ने मनरेगा कानून को पुनः प्रभावी ढंग से बहाल करने, मजदूरों के लिए 200 दिन का वार्षिक कार्य दिवस सुनिश्चित करने और 600 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय करने की मांग की. साथ ही कृषि को मनरेगा से जोड़ने और बेरोजगार नौजवानों को रोजगार देने, अथवा 10,000 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता व वृद्धजनों को 3,000 रुपये मासिक पेंशन देने की मांग उठाई गई. प्रदर्शन के अंत में नेताओं ने मांगों से संबंधित एक मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा. इस मौके पर रामनारायण बनरैत, सुर्यनारायण महतो, उपेंद्र सिंह और लक्ष्मण चौधरी सहित दर्जनों नेता मौजूद रहे.
मधुबनी से कार्तिक कुमार की रिपोर्ट
