मधुबनी: गिरिजास्थान से मिली 800 साल पुरानी देवी तारा की मूर्ति, बौद्धकालीन धरोहर का सुराग

Madhubani News: मधुबनी के फुलहर स्थित गिरिजास्थान से बौद्ध देवी तारा की करीब 800 साल पुरानी दुर्लभ मूर्ति और कैथी लिपि वाला पुरावशेष मिला है. विशेषज्ञों ने इसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज बताते हुए संग्रहालय में सुरक्षित रखने की मांग की है. पढे़ं पूरी खबर…

मधुबनी से रमण कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

Madhubani News: मधुबनी जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल फुलहर स्थित गिरिजास्थान से एक बेहद महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज सामने आई है. यहां बौद्ध देवी तारा की दुर्लभ प्रतिमा मिलने के बाद इतिहास और पुरातत्व जगत में उत्साह का माहौल है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मूर्ति करीब 700 से 800 वर्ष पुरानी हो सकती है. इस खोज को मिथिला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

बौद्ध देवी तारा की दुर्लभ प्रतिमा मिली

जानकारी के अनुसार गिरिजास्थान क्षेत्र से मिली यह प्रतिमा बौद्ध धर्म में पूजनीय देवी तारा की बताई जा रही है. प्रतिमा की कलात्मक बनावट और शैली को देखते हुए इसे मध्यकालीन कालखंड का माना जा रहा है. पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की प्रतिमाएं उस दौर में बौद्ध संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की समृद्ध उपस्थिति को दर्शाती हैं.

धातु निर्मित पुरावशेष भी बरामद

मूर्ति के साथ एक धातु से निर्मित पुरावशेष भी मिला है. खास बात यह है कि इस पर कैथी लिपि में “श्री सीताराम” अंकित है. इससे क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास के नए पहलुओं पर शोध की संभावनाएं बढ़ गई हैं. विशेषज्ञ इन पुरावशेषों के विस्तृत अध्ययन की तैयारी में जुटे हैं.

संग्रहालय में सुरक्षित रखने की मांग

इन्टैक बिहार स्टेट के को-कन्वेनर शिव कुमार मिश्र ने इस खोज की जानकारी जिलाधिकारी मधुबनी और बिहार पुरातत्व निदेशालय को भेजी है. उन्होंने मांग की है कि नियमानुसार इन ऐतिहासिक धरोहरों को सरकारी संरक्षण में लिया जाए और मिथिला ललित संग्रहालय, सौराठ में सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को देख सकें.

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Published by: Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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