मधुबनी में 29 दिन से कातिबों का कार्य बहिष्कार, जमीन रजिस्ट्री 45 से घटकर 10-15 दस्तावेज प्रतिदिन

मधुबनी में जमीन निबंधन का काम ठप पड़ गया है. कातिबों के 29 दिनों से कार्य बहिष्कार के कारण पेपरलेस प्रक्रिया का विरोध जारी है. इससे सरकार को प्रतिदिन लाखों का राजस्व नुकसान हो रहा है.

मधुबनी: जिला अवर निबंधन कार्यालय सहित जिले के अन्य पांच निबंधन कार्यालयों में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों के निबंधन का काम काफी धीमा हो गया है. जिला अवर निबंधन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पेपरलेस निबंधन प्रक्रिया के विरोध में कातिबों के कार्य बहिष्कार के कारण नियमित निबंधन प्रभावित हुआ है.

कातिब संघ के अनुसार, 29 दिनों से कार्य बहिष्कार जारी है. वहीं, अधिकारियों के मुताबिक निबंधन की संख्या में काफी कमी आयी है और इससे सरकार को प्रतिदिन करीब 10 से 12 लाख रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है.

पेपरलेस निबंधन को लेकर कातिबों का विरोध

कातिब संघ के जिला उपाध्यक्ष इस्माइल मुंशी ने कहा कि 29 दिनों से कातिब कार्य बहिष्कार पर हैं. उन्होंने कहा कि विभाग के नियम के तहत पेपरलेस निबंधन प्रक्रिया शुरू होने के बाद निबंधन पूरा होने पर क्रेता को 16 पेज से लेकर 57 पेज तक का दस्तावेज भेजा जा रहा है.

उनका कहना है कि ओटीपी की प्रक्रिया के कारण क्रेता और विक्रेता को परेशानी हो रही है.

एमबीआर की स्टांप ड्यूटी बढ़ने पर भी सवाल

कातिब संघ के जिलाध्यक्ष राम उदगार यादव ने कहा कि यदि पेपरलेस निबंधन प्रक्रिया शुरू की गयी है तो क्रेता से एमबीआर की एक फीसदी स्टांप ड्यूटी क्यों बढ़ायी गयी. उन्होंने कहा कि पेपरलेस प्रक्रिया होने के बावजूद विभाग स्कोर के नाम पर एक हजार रुपये ले रहा है, जबकि पहले इसके लिए सिर्फ 500 रुपये देने पड़ते थे.

कातिब संघ के कोषाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पहले भी निबंधन के बाद क्रेता और विक्रेता के मोबाइल पर दस्तावेज की कॉपी भेजी जाती थी. हालांकि, उस समय ओटीपी नहीं लिया जाता था.

प्लेन पेपर पर दस्तावेज मिलने को लेकर संशय

कातिबों का कहना है कि विभाग की ओर से प्लेन पेपर पर दस्तावेज दिया जा रहा है. इसे लेकर क्रेताओं में संशय बना हुआ है.

कातिब अमीर कुमार चौधरी, ब्रह्मानंद झा, मो. कलीम और उमाशंकर कुमार ने कहा कि सरकार का जो भी निर्णय होगा, उसे वे तभी स्वीकार करेंगे, जब विभाग कातिबों के साथ बैठकर इस पर निर्णय लेगा.

पहले रोजाना 45, अब 10-15 दस्तावेज का निबंधन

जिला अवर निबंधन पदाधिकारी अजय कुमार झा ने कहा कि निबंधन पहले की तुलना में कम हुआ है. पहले प्रतिदिन करीब 45 दस्तावेजों का निबंधन होता था, लेकिन कातिबों के कार्य बहिष्कार के कारण अब प्रतिदिन 10 से 15 दस्तावेजों का ही निबंधन हो रहा है.

उन्होंने बताया कि नियमित निबंधन नहीं होने से प्रतिदिन करीब 10 से 12 लाख रुपये के राजस्व की हानि हो रही है. अधिकारी ने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में है. न्यायालय का जो आदेश होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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By Kunjan Kumar Putti

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