झंझारपुर में 15 दिनों से एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म, कुत्ता काटने पर बाहर से 404 रुपये की एक डोज खरीद रहे मरीज

मधुबनी में एंटी रेबीज वैक्सीन की किल्लत। कुत्ता काटने वाले मरीजों को ₹404 में खरीदनी पड़ रही दवा, गरीब परिवारों पर बढ़ा बोझ। जल्द आपूर्ति की मांग।

मधुबनी: झंझारपुर अनुमंडल अस्पताल और प्रखंड के पीएचसी में पिछले करीब 15 दिनों से एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म है. कुत्ता काटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को वैक्सीन नहीं मिल रही है. ऐसे में मरीजों को निजी दवा दुकानों से 404 रुपये प्रति डोज की दर से वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है. इससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.

पांच डोज लेना जरूरी, एक डोज छूटी तो इलाज अधूरा

मिली जानकारी के अनुसार, कुत्ता काटने के बाद मरीज को पांच डोज एंटी रेबीज वैक्सीन लेना जरूरी होता है. चिकित्सकों के अनुसार कुत्ता काटने वाले दिन पहला डोज, इसके बाद तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन वैक्सीन लगायी जाती है. एक डोज छूटने पर इलाज अधूरा माना जाता है और रेबीज का खतरा बना रहता है.

404 रुपये की एक डोज, पांच इंजेक्शन में 2 हजार से अधिक खर्च

अस्पताल पहुंचे सर्वसीमा गांव के दिगंबर कामत ने बताया कि उन्हें कुत्ते ने काट लिया था. इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, तो वैक्सीन खत्म होने की जानकारी दी गयी. मजबूरी में उन्हें बाहर से वैक्सीन खरीदनी पड़ी. इसी तरह कोठिया भरौल गांव के साहबान अंसारी और झंझारपुर के परी रंजन सिंह ने भी वैक्सीन नहीं मिलने की शिकायत की.

मरीजों का कहना है कि एक इंजेक्शन की कीमत 400 रुपये से अधिक है. पांच डोज के लिए उन्हें 2 हजार रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है. गरीब परिवारों के लिए इतनी राशि जुटाना मुश्किल हो रहा है. मरीजों का आरोप है कि वैक्सीन की लगातार कमी के बावजूद विभाग इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है.

बिस्फी पीएचसी से मिली थी 40 वायल वैक्सीन

अनुमंडल अस्पताल के प्रबंधक झा गिरीश कुमार ने बताया कि करीब 15 दिन पहले बिस्फी पीएचसी से 40 वायल एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध करायी गयी थी. अब वह भी खत्म हो चुकी है. दवा की अनुपलब्धता को लेकर जिला कार्यालय को लिखित सूचना दे दी गयी है. उन्होंने कहा कि आपूर्ति होते ही मरीजों को वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएगी.

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी चिंता, जल्द आपूर्ति की मांग

लगातार एंटी रेबीज वैक्सीन की किल्लत से ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ गयी है. प्रखंड क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या अधिक होने के कारण रोजाना कुत्ता काटने के मामले सामने आने की बात कही जा रही है. सरकारी अस्पताल में मुफ्त वैक्सीन नहीं मिलने से मरीजों को निजी क्लीनिक और मेडिकल दुकानों का रुख करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से अविलंब एंटी रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि कुत्ता काटने वाले गरीब मरीजों को निजी स्तर पर महंगी वैक्सीन खरीदने की मजबूरी से राहत मिल सके.

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लेखक के बारे में

By संजय कुमार

संजय कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. झंझारपुर (मधुबनी) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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