मधुबनी.
जेएमडीएल महिला कॉलेज के सभागार में महाकवि लाल दास स्मृति व्याख्यान माला सह एकल काव्य पाठ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ सत्येंद्र प्रसाद सिंह, मुख्य अतिथि भैरव लाल दास, साहित्यकार उदय चंद्र झा विनोद, डॉ विनय कुमार दास, महेंद्र नारायण राम, विद्यानंद झा, डॉ रघुनंदन यादव, शुभ कुमार वर्णवाल, जेके दत्त, डॉ संजीव शमा, चंदना दत्त आदि ने किया. अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ सत्येंद्र प्रसाद सिंह ने की. साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाकवि लालदास स्मृति व्याख्यान माला सह काव्य पाठ में अध्यक्ष ने कहा कि महाकवि लालदास की रचनाएं आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं. ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी में भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान और लगाव बढ़ेगा. इस व्याख्यानमाला और काव्य-पाठ कार्यक्रम के माध्यम से हम न केवल उनके कृतित्व को स्मरण कर रहे हैं, बल्कि नयी पीढ़ी को यह प्रेरणा भी दे रहे हैं कि वे अपनी भाषा, अपने लोक और अपनी परंपरा से जुड़े रहें. मैं इस आयोजन के सभी सहयोगियों, आयोजक मंडल, वक्ताओं तथा सहभागी कवियों का हार्दिक अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने अपने विचारों से इस कार्यक्रम को सार्थक बनाया. मुख्य अतिथि भैरव लाल दास ने कहा कि आज का यह अवसर हमारे लिए अत्यंत गौरव और आत्मिक सुख का विषय है. हम सब यहां एकत्र हुए हैं महाकवि लालदास की पावन स्मृति में उस युग प्रवर्तक कवि को नमन करने, जिन्होंने अपनी लेखनी से न केवल मैथिली साहित्य को समृद्ध किया. बल्कि जनमानस में भाषा और संस्कृति के प्रति नवचेतना का संचार किया. महाकवि लालदास का काव्य लोकजीवन की सजीव अभिव्यक्ति है. उसमें गांव की मिट्टी की सोंधी महक है, लोकभाषा की सहजता है और जीवन-सत्य की गूंज है. उनके शब्द आज भी हमें यह सिखाते हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण और मार्गदर्शक होता है. साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार उदय चंद्र झा विनोद ने कहा कि आज का यह पावन अवसर उस विभूति को स्मरण करने का है, जिनकी लेखनी ने मिथिला की धरती को गौरवान्वित किया. महाकवि लालदास न केवल शब्दों को स्वर दिया, बल्कि लोक की संवेदना को अमर कर दिया. उनकी रचनाओं में जीवन की सच्चाई, समाज की करुणा और संस्कृति की आत्मा स्पंदित होती है. जब हम लालदास को याद करते हैं, तो दरअसल हम उस लोकधारा को नमन करते हैं, जिसने साहित्य को जन-जीवन से जोड़ा. उन्होंने दिखाया कि कविता केवल कल्पना नहीं, बल्कि समाज के हृदय की धड़कन है.उन्होंने रमेश्वरररित रामायण की रचना कर मेथिली भाषा साहित्य को प्रतिष्ठित किया. आज के इस युग में जब शब्द अक्सर अपने अर्थ खो रहे हैं, लालदास की रचना हमें सिखाती है कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवता की अभिव्यक्ति है. अंत में, मैं महाकवि लालदास के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही कहना चाहूंगा- साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, यह आत्मा और समाज के बीच का संवाद है. महेंद्र नारायण राम ने कहा कि महाकवि लाल दास ने अपनी लेखनी से न केवल मिथिला की संस्कृति, संवेदना और जनजीवन को स्वर दिया, बल्कि पूरे मैथिली-साहित्य जगत को अपनी अमर रचनाओं से समृद्ध किया. लालदास की कविताएं केवल शब्द नहीं थीं-वे समाज के हृदय की धड़कन थीं. उनमें लोक की मिट्टी की गंध थी, जनभावनाओं की सच्चाई थी, और सत्य, सौंदर्य तथा करुणा का अद्भुत संगम था. उनकी वाणी में जहां रामायण के आदर्श झलकते हैं, वहीं आम जन के संघर्ष और स्वाभिमान की पुकार भी सुनाई देती है.
डॉ संजीव शमा ने कहा कि आज जब समाज तेज़ी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे समय में लालदास जैसी विभूतियों की स्मृति हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखती है. उनकी स्मृति में आयोजित यह व्याख्यानमाला न केवल एक श्रद्धांजलि है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी है. शुभ कुमार वर्णवाल ने कहा कि कविता वह दीप है जो अंधकार में भी राह दिखाती है, और कवि वह साधक है जो शब्दों में सत्य की खोज करता है. महाकवि लालदास की स्मृति हमारे साहित्यिक जीवन में सदा अमर रहे. महाकवि लालदास के शब्द सदा हमारे पथप्रदर्शक बने रहेंगे. डॉ रघुनंदन यादव ने कहा कि कवि की अमरता उसके शब्दों में बसती है, और शब्दों की शक्ति समाज को दिशा देती है. उन्होंने कहा कि उनकी कविता में जो सहजता, संवेदना और सादगी है, वही हमारे समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. मैं आयोजकों को हृदय से धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने इस स्मृति व्याख्यानमाला के माध्यम से साहित्यिक चेतना को जीवित रखने का सुंदर प्रयास किया है.व्याख्यान माला में छात्रों ने भी महाकवि लाल दास की रचना की प्रस्तुति दी
छात्रों ने महाकवि लालदास की अमर रचनाओं की प्रस्तुति कर सभागार में एक भावपूर्ण और साहित्यिक वातावरण बना दिया. कार्यक्रम के मध्य भाग में जब मंच पर छात्रों ने प्रवेश किया, तो पूरे सभागार में एक अद्भुत शांति छा गई. प्रथम प्रस्तुति में छात्रा ने लालदास की प्रसिद्ध रचना “संगीत सरिता” के अंशों का भावपूर्ण पाठ किया. उनकी मधुर आवाज़ और स्पष्ट उच्चारण ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. दूसरी प्रस्तुति में छात्र ने कवि की रचना “धरती के गीत” का गायन व पाठ किया. जिसमें लोकजीवन की सादगी और श्रम की महिमा झलक रही थी. दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर उनका स्वागत किया. तीसरी प्रस्तुति में छात्रा ने लालदास की प्रसिद्ध पंक्तियां- भाषा में भाव हो, शब्द में संस्कार हो,
कवि वही, जिसके गीतों में समाज का आधार हो, का पाठ किया. इस प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम को चरम पर पहुंचा दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा महाकवि लालदास की रचनाओं की प्रस्तुति न केवल उनकी स्मृति को नमन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में साहित्यिक संस्कारों का संचार भी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
