Madhubani News : दिसंबर तक जिले के 50 प्रतिशत पीएचसी व एपीएचसी का एनक्वास प्रमाणीकरण अनिवार्य

जिले के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्रामीण स्तर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का एनक्वास प्रमाणीकरण किया जाना है.

मधुबनी. जिले के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्रामीण स्तर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का एनक्वास प्रमाणीकरण किया जाना है. जिले के चयनित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भवानीपुर और मकरमपुर को नेशनल सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है. वहीं, जिले में 14 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का एनक्वास प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक नेहा कुमारी ने सिविल सर्जन को जिले 50 प्रतिशत पीएचसी एवं एपीएचसी को दिसंबर महीने तक एनक्वास प्रमाणीकरण को पूरा करने का निर्देश दिया है. जारी पत्र के अनुसार, इन संस्थाओं में प्रसव कक्ष, ओपीडी, आइपीडी, जनरल एडमिनिस्ट्रेशन का इंटरनल असेसमेंट कर राज्य को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. ताकि राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणीकरण कर दिसंबर तक लक्ष्य हायिल किया जा सके. इस संबंध में जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा ने कहा है कि चिन्हित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के संबंधित कर्मियों को एनक्वास प्रमाणीकरण की तैयारी के लिए चिन्हित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की पुनः इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन एवं सर्विस डिलीवरी व अन्य मानक की समीक्षा कर संस्थान का चयन करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने बताया कि एनक्यूएएस प्रमाणीकरण से प्राथमिक स्तर पर मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा= गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं बढेंगी. प्रमाणीकरण होने से स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों के लिए मिलने वाली सुविधाओं से स्थानीय लोगों का विश्वास स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ेगा. वहीं, इसके दूरगामी परिणामों में हेल्थ इंडिकेटर में भी वृद्धि होगी. एनक्यूएएस के लिए इस तरह होता है मूल्यांकन एनक्वास प्रमाणीकरण के लिए प्रथम स्तर पर इंटरनल असेसमेंट, इसके बाद राज्य स्तरीय टीम द्वारा मूल्यांकन किया जाता है. राज्य स्तरीय टीम के संतुष्ट होने पर केंद्रीय टीम को जांच के लिए लिखा जाता है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की टीम द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक सर्टिफिकेशन के लिए अस्पतालों का 12 मानकों पर मूल्यांकन किया जाता है. इसके लिए अस्पताल द्वारा सेवा प्रदायगी, मरीज संतुष्टि, क्लिनिकल सर्विसेस, इनपुट, संक्रमण नियंत्रण, सपोर्ट सर्विसेस, गुणवत्तापूर्ण प्रबंध, आउटपुट जैसे मानकों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है. मूल्यांकन में खरा उतरने वाले अस्पतालों को भारत सरकार की ओर से गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है. एनक्वास प्रमाणीकरण से स्वास्थ्य सेवा पर दिखेगा असर डीपीसी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों के एनक्यूएएस प्रमाणीकरण के बाद स्वास्थ्य संस्थान को एनक्वास का प्रमाणीकरण होने पर वहां मिलने वाली 12 तरह की सेवाओं पर असर पड़ता है. इससे “की इंडिकेटर परफोरमेंस” में बढ़ोतरी होगी. एएनसी, टीकाकरण, ओपीडी, परिवार नियोजन, आउटरीच में होने वाली एक्टिविटी का विस्तार होगा. पेशेंट सटिस्फैक्टरी सर्वे से संस्थान पर उपलब्ध सेवाओं का विस्तार होगा. केंद्र पर इंफ्रा का विकास होगा. इसका सीधा असर वहां के स्वास्थ्य सुविधाओं का पड़ेगा. स्वस्थ माहौल का निर्माण होगा जो स्वास्थ्य के चहुंमुखी विकास के लिए जरूरी है. 15 एपीएचसी व 2 पीएचसी का किया गया है लाइन लिस्टिंग अपर कार्यपालक निदेशक नेहा कुमारी ने दिसंबर तक जिला के दो पीएचसी एवं 15 एपीएचसी को एनक्वास प्रमाणीकरण कराने का निर्देश दिया है. जिसमें अंधराठाढ़ी प्रखंड के पीएचसी रुद्रपुर, बासोपट्टी प्रखंड के छतौनी, एपीएचसी घोघरडीहा, जयनगर प्रखंड के एपीएचसी कमलापट्टी एवं एपीएचसी कोरहिया, झंझारपुर प्रखंड के एपीएचसी अररिया संग्राम, नवानी एवं काको, लखनौर प्रखंड के एपीएचसी तमुरिया, खुटौना प्रखंड के एपीएचसी लौकहा, मधेपुर प्रखंड के एपीएचसी भेजा एवं पीएचसी मधेपुर, पंडौल प्रखंड के एपीएचसी सरसोपाही, एपीएचसी भगवतीपुर एवं पीएचसी पंडौल, फुलपरास प्रखंड के एपीएचसी सुगापट्टी एवं राजनगर प्रखंड के एपीएचसी कोइलख शामिल है. विदित हो कि जिला में 58 एपीएचसी एवं 10 पीएचसी क्रियाशील है.

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By GAJENDRA KUMAR

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