Madhubani News: राज्य में पूर्ण नशामुक्ति के संकल्प को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ड्रग डी-एडिक्शन प्रोग्राम के तहत नई पहल शुरू की है. इसके तहत मधुबनी जिले में मादक द्रव्यों और दवाओं के सेवन से होने वाले विकार यानी सब्सटेंस यूज डिसऑर्डर के बेहतर इलाज और प्रबंधन की तैयारी की जा रही है. इसके लिए जिले से एक योग्य चिकित्सा पदाधिकारी का चयन कर 12 सप्ताह के लाइव ऑनलाइन क्षमता-निर्माण प्रशिक्षण में शामिल कराया जाएगा.
1 सितंबर से शुरू होगा प्रशिक्षण
राज्य स्तर पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा. राज्य स्वास्थ्य समिति के निदेशक (वित्त-सह-प्रभारी, प्रशिक्षण) वृन्दा लाल के निर्देश के अनुसार मधुबनी से चयनित चिकित्सा पदाधिकारी का नामांकन 28 अगस्त 2026 तक विभाग को भेजा जाएगा.
प्रशिक्षण पूरी तरह लाइव ऑनलाइन मोड में आयोजित होगा और लगातार 12 सप्ताह यानी करीब तीन महीने तक चलेगा. प्रत्येक सप्ताह डॉक्टरों के लिए 45 से 60 मिनट का विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया जाएगा.
नशे की लत के मरीजों की पहचान से इलाज तक की मिलेगी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सा पदाधिकारियों को नशे की लत से जूझ रहे मरीजों की पहचान, उनकी काउंसलिंग और उपचार से जुड़ी जानकारी दी जाएगी. साथ ही दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की पहचान और उनके प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इसका उद्देश्य जिले में नशे से प्रभावित लोगों को वैज्ञानिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है.
जिले में तैयार होगा विशेषज्ञ डॉक्टर
सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि मादक द्रव्यों के सेवन की लत गंभीर मानसिक और शारीरिक बीमारी है. इसका वैज्ञानिक और संवेदनशील तरीके से इलाज जरूरी है.
उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर मधुबनी से एक चिकित्सा पदाधिकारी को प्रशिक्षण के लिए नामांकित किया जा रहा है. 12 सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिले में नशामुक्ति के क्षेत्र में प्रशिक्षित डॉक्टर उपलब्ध होगा, जिससे प्रभावित युवाओं और नागरिकों को उचित परामर्श और चिकित्सीय सहायता मिल सकेगी.
डॉक्टरों के साथ अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी क्षमता बढ़ेगी
कार्यक्रम के अगले चरणों में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े अन्य कर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, परामर्शदाता और मनोवैज्ञानिक शामिल होंगे.
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण स्तर पर नशे से जुड़े शुरुआती लक्षणों की पहचान करने में मदद करेंगे. परामर्शदाता मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक सहयोग देंगे, जबकि मनोवैज्ञानिक नशे की लत से जुड़े तनाव और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं के प्रबंधन में सहायता करेंगे.
28 अगस्त तक भेजा जाएगा डॉक्टर का नाम
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार चयनित चिकित्सा पदाधिकारी का नामांकन निर्धारित अंतिम तिथि 28 अगस्त 2026 से पहले विभाग के आधिकारिक ईमेल पर भेज दिया जाएगा. इससे चयनित डॉक्टर 1 सितंबर से शुरू होने वाले प्रशिक्षण के पहले सत्र से ही इस अभियान का हिस्सा बन सकेंगे.
