मधुबनी: टीबी अभियान की समीक्षा में डीएम का बड़ा एक्शन, अनुपस्थित PHC प्रभारी का वेतन रोकने का निर्देश

मधुबनी जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की है. हरलाखी पीएचसी प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा गया और वेतन स्थगित करने का निर्देश दिया गया. अभियान में शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

Madhubani DM: मधुबनी में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने अभियान में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया. वर्चुअल बैठक से अनुपस्थित रहने पर हरलाखी पीएचसी प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगने और वेतन स्थगित करने का निर्देश दिया.

99.9% लक्ष्य हासिल, फिर भी डीएम ने बरती सख्ती

जिलाधिकारी आनंद शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार देर शाम वर्चुअल माध्यम से टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई. बैठक में 24 मार्च से 14 जुलाई तक संचालित विशेष टीबी स्क्रीनिंग अभियान की प्रखंडवार और दैनिक प्रगति का आकलन किया गया. समीक्षा में बताया गया कि 14 जुलाई को स्क्रीनिंग का लक्ष्य 12,250 लोगों का था, जिसमें 12,239 लोगों की स्क्रीनिंग कर 99.9 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई.

हरलाखी PHC प्रभारी पर कार्रवाई

बैठक के दौरान वर्चुअल समीक्षा से अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरलाखी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शमीम से स्पष्टीकरण मांगने और उनका वेतन स्थगित करने का निर्देश दिया. डीएम ने कहा कि भारत सरकार और बिहार सरकार के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को मिशन मोड में पूरा करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है.

टीबी जांच और इलाज में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

जिलाधिकारी ने संभावित टीबी मरीजों की पहचान, स्क्रीनिंग और जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतने का निर्देश दिया. उन्होंने एक्स-रे, NAAT जांच, डिफरेंशियल टीबी केयर, टीपीटी केयर, निक्षय मित्र पहल, पोषण सहायता और उपचाराधीन मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की भी समीक्षा की.

इन क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सा पदाधिकारियों से भी स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया. साथ ही निक्षय पोर्टल पर सभी सूचनाओं की शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने को कहा गया.

कम प्रगति वाले प्रखंडों को चेतावनी

डीएम ने अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले प्रखंडों के अधिकारियों को विशेष कार्ययोजना बनाकर अभियान में तेजी लाने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता, एएनएम, जीविका दीदी, आंगनबाड़ी सेविका और अन्य क्षेत्रीय कर्मियों के सहयोग से घर-घर टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाए, ताकि कोई भी संभावित मरीज जांच और इलाज से वंचित न रहे.

जनभागीदारी से सफल होगा अभियान

जिलाधिकारी ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जन आंदोलन है. इसमें सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की नियमित समीक्षा होगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी.

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