मधुबनी. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र नदी एवं सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाई. आस्था की डुबकी लगाने के बाद लोगों ने निकट के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर पुण्य के भागी बने. इस बार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर ग्रहों का विशेष योग बना है. इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग, शिववास योग, और भरणी नक्षत्र का संयोग है, जो इसे अत्यंत शुभ बना रहा है. इस दिन चंद्रमा मेष राशि में और शुक्र अपनी स्वराशि तुला में रहेंगे, इससे समसप्तक योग बना है, जो जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का संकेत देता है. शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन कई विशेष घटनाएं हुई है. इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था. इसके कारण इसे ””””””””त्रिपुरारी पूर्णिमा”””””””” भी कहते है. इस दिन गंगा स्नान और दीपदान को पुण्य कारी माना गया है. इससे पाप नष्ट होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. पं. पंकज झा शास्त्री के अनुसार यह विशेष खगोलीय योग बनाता है. इस दिन भगवान विष्णु, शिव और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से बुध और शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं और उनके शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है. कार्तिक पूर्णिमा पर किए गए उपाय दीपदान और छाया दान, ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और शनि देव को प्रसन्न करने में मदद करता है.
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