आउटसोर्सिंग सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था ठप

मधुबनी में आउटसोर्सिंग सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है. तीन सूत्री मांगों को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन से जगह-जगह कचरे के ढेर लगने की आशंका है. इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ सकता है.

Madhubani News: बिहार लोकल बॉडीज एम्प्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर आउटसोर्सिंग मजदूर सफाई संघ ने गुरुवार से अपनी तीन सूत्री मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी. हड़ताल के पहले ही दिन मधुबनी शहर की साफ-सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई. जगह-जगह कचरे का ढेर लगने लगा, जबकि घरों से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण भी बंद रहा.

नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

हड़ताल के पहले दिन बड़ी संख्या में सफाई कर्मी नगर निगम कार्यालय के समीप जुटे और नगर निगम प्रशासन तथा राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. आउटसोर्सिंग मजदूर सफाई संघ के महामंत्री बबलू राम ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है.

संघ के अध्यक्ष पप्पू राम, महामंत्री बबलू राम, दुर्गा राम, नौशाद अली, शंकर राम, अजय राम, रहमान, राजेंद्र राम तथा अखिल भारतीय वाल्मीकि महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद कुमार सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए.

कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगें

सफाई कर्मियों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा का स्थायीकरण.
  • सफाई व्यवस्था में आउटसोर्सिंग प्रणाली को समाप्त किया जाए.
  • मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी करते हुए बकाया राशि का भुगतान किया जाए.

संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस लिखित समझौता नहीं होता, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी.

350 से अधिक कर्मियों के हड़ताल पर रहने से व्यवस्था प्रभावित

हड़ताल के कारण करीब 350 से अधिक सफाई कर्मियों ने काम बंद कर दिया है. इससे शहर के सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, मुख्य सड़कों, गलियों और नालियों की सफाई प्रभावित हुई है. वहीं जलजमाव वाले क्षेत्रों में पानी निकासी का कार्य भी बाधित होने लगा है.

यदि हड़ताल लंबी चली तो शहर के विभिन्न इलाकों में कचरे का अंबार लगने और गंदगी के कारण लोगों को परेशानी के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है.


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By Ashok kumar thak

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