30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं से स्वास्थ्य विभाग की अपील, हर पांच साल पर कराएं सर्वाइकल कैंसर की जांच

30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संदेश. स्वास्थ्य विभाग ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए हर पांच साल पर नियमित स्क्रीनिंग कराने की अपील की है. जानें इस गंभीर लेकिन रोके जा सकने वाले रोग के बारे में और कैसे कराएं निःशुल्क जांच.

Madhubani News: महिलाओं में होने वाले कैंसरों में सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर एक गंभीर, लेकिन पूरी तरह रोके जा सकने वाला रोग है. स्वास्थ्य विभाग ने 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं से हर पांच वर्ष पर नियमित स्क्रीनिंग कराने की अपील की है. विभाग का कहना है कि समय पर जांच और उपचार से इस बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज संभव है.

समय पर जांच से बचाई जा सकती है जान

विशेषज्ञों के अनुसार गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता. ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग ही इस बीमारी की समय रहते पहचान का सबसे प्रभावी माध्यम है. यदि शुरुआती चरण में कैंसर का पता चल जाए तो उपचार अधिक सफल होता है और गंभीर जटिलताओं की आशंका काफी कम हो जाती है.

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है निःशुल्क जांच सुविधा

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. महिलाएं अपने नजदीकी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निःशुल्क जांच करा सकती हैं. आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को आगे की जांच एवं उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर भी किया जाता है.

एचपीवी संक्रमण से बचाव और जागरूकता पर जोर

सदर अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रागिनी ने बताया कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है. उन्होंने कहा कि सुरक्षित जीवनशैली अपनाना, एचपीवी टीकाकरण (जहां उपलब्ध हो), नियमित जांच कराना तथा असामान्य रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त स्राव या लगातार पेल्विक दर्द जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं से की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं और उनके परिजनों से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण का हिस्सा बनाने की अपील की है. विभाग का कहना है कि प्रत्येक पांच वर्ष पर स्क्रीनिंग कराने से बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव है. साथ ही लोगों से अपने आसपास की महिलाओं को भी इस संबंध में जागरूक करने का आग्रह किया गया है.

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Author: Anil kunar jha

Published by: Purushottam Kumar

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