Madhubani News : इंटरनेट के दौर में भी पुस्तकों का कायम है आकर्षण

राष्ट्रीय पुस्तक प्रेमी दिवस पर शहर के मीना बाजार स्थित स्कॉलर लाइब्रेरी परिसर में पुस्तकें हमारा सच्चा साथी है विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई.

मधुबनी. राष्ट्रीय पुस्तक प्रेमी दिवस पर शहर के मीना बाजार स्थित स्कॉलर लाइब्रेरी परिसर में पुस्तकें हमारा सच्चा साथी है विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई. वहीं, लाइब्रेरी के प्रबंधक कमलेश पाठक ने कहा कि इंटरनेट मीडिया के दौर में भी विद्यार्थियों में पुस्तकों का आकर्षण कायम है. पुरानी पुस्तकों की दुकानें, निजी व सार्वजनिक लाइब्रेरी, रीडर्स क्लब और पुस्तक मेला में उमड़ती भीड़ दर्शाता है कि आज भी पाठकों का पुस्तकों से गहरा जुड़ाव है. पुस्तक प्रेमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अंशु ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के दौर में यह आशंका बार-बार जाहिर की जाती है कि पाठकों का अभाव हो रहा है या पुस्तकें पढ़ने वाले अब बहुत कम लोग बचे हैं, लेकिन यह सोचना गलत है. लाइब्रेरी में प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. युवाओं में भी पुस्तकों के प्रति रुझान बढ़ा है. कुछ दशक पहले तक पुस्तकें ज्ञान, मनोरंजन और जीवन मूल्यों का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत था. घर में एक छोटी-सी लाइब्रेरी होना गर्व की बात होती थी. जो लोग पुस्तकें खरीद नहीं पाते थे वे संस्थागत पुस्तकालयों का सहारा लेते थे. वहां एक अकाउंट खुलता था. किताबें इश्यू होती थी और पढ़कर वापस कर दी जाती थी. यह एक संस्कार था. ज्ञान साझा करने का संस्कार, पुस्तकें पाठकों की एकाग्रता, धैर्य और अध्ययनशीलता को बढ़ावा देती है. युवाओं की एक पूरी पीढ़ी पुस्तकों में जीवन तलाशते हैं. पुस्तकों की रचना लेखन की गहराई, संवेदना और शोध के आधार पर होता है. अब लेखन की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भी प्रवेश कर लिया है. पुस्तकें रचनात्मकता को एक नई दिशा भी देता है. बदलते परिदृश्य में यह जरूरी हो गया है कि हम पुस्तक प्रेम को फिर से पुनर्जीवित करें. बच्चों को लाइब्रेरी का संस्कार दें, युवाओं को डिजिटल लेखन के साथ-साथ परंपरागत साहित्यिक रचनाएं पढ़ने के लिए प्रेरित करें. पुस्तकों का संसार केवल जानकारी नहीं देता, वह दृष्टिकोण भी गढ़ता है. ज्ञान हमेशा से सर्वोपरि रहा है. सभी लोग जीवन में सफल होना चाहते हैं. सफलता की कुंजी को प्राप्त कर अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं. इसके लिए पुस्तकों का निरंतर अध्ययन जरूरी होता है. परिचर्चा में प्रिया ठाकुर, प्रीति झा, सागर झा, विशाल यादव, लवकुश कुमार, संगीत झा, रजनीश कुमार आदि ने भाग लिया.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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