पुरुष प्रभारी के जिम्मे महिला थाना

चार साल में आये करीब पांच सौ मामले मधुबनी : जिले में महिला थाना बस नाम मात्र को रह गया है. जिस उद्देश्य से इसकी स्थापना की गयी वह संसाधन के अभाव में पूरा ही नहीं हो सका. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि महिला थाना का थानाध्यक्ष पिछले तीन साल से पुरुष पुलिस हैं. […]

चार साल में आये करीब पांच सौ मामले

मधुबनी : जिले में महिला थाना बस नाम मात्र को रह गया है. जिस उद्देश्य से इसकी स्थापना की गयी वह संसाधन के अभाव में पूरा ही नहीं हो सका. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि महिला थाना का थानाध्यक्ष पिछले तीन साल से पुरुष पुलिस हैं. नाम मात्र को एक महिला सहायक अवर निरीक्षक है. हर साल इस थाने में प्राथमिकी तो दर्ज हो रही है, पर इसका निबटरा नहीं हो पा रहा. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि केवल प्राथमिकी दर्ज करने भर की भूमिका इस थाना की रह गयी है.
2012 में की गयी स्थापना
सरकार के निर्देशानुसार हर जिले में महिला थाना खुलनी थी. सो यहां भी खुला. नगर थाना के परिसर में पुलिस के रहने के लिये बने क्वार्टर को ही महिला थाना बना दिया गया. उस समय नुसरत जहां नामक एक महिला पुलिस को थाना प्रभारी बनाया गया. ऐसा लगा कि जिले के महिलाओं के हित की रक्षा के लिये सार्थक कदम उठाया गया है. तत्कालीन जिला पदाधिकारी एवं तत्कालीन एस पी ने इस थाने का उद्घाटन किया.
पर इसके बाद से इसमें केवल समस्याओं का अंबार रह गया. जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे हैं समस्याएं बढ़ती जा रही है. वही संसाधन दिन व दिन कम होता जा रहा है.
महिला थाने में दर्ज होती है प्राथमिकी
चाल साल में खूब आये मामले
पिछले चाल साल में स्थापना के बाद से अब तक इस थाने में मामले कम नहीं आये है. थाने से मिली जानकारी के अनुसार करीब पांच सौ मामले चार साल में आये हैं. जिसमें से अिधकतर की जांच चल रही है
साल आये मामले
2012 43
2013 104
2014 88
2015 91
2016 75

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