ग्वालपाड़ा प्रखंड के टेमाभेला कंटाही गांव में नौ दिनों से चल रहा चैती नवरात्रि का महापर्व शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हो गया. शक्ति की उपासना के इस उत्सव का समापन शनिवार की देर रात मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के साथ हुआ. विसर्जन से पूर्व मंदिर प्रांगण में एक अत्यंत भावुक दृश्य दिखा. गांव की सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार माता रानी की पूजा-अर्चना की और मां दुर्गा को खोंइछा (विदाई की रस्म) दिया. महिलाओं ने नम आंखों से सुख, शांति और परिवार की समृद्धि की कामना करते हुए माता को विदाई दी. इस दौरान सिंदूर खेल और पारंपरिक गीतों से पूरा परिसर भक्तिमय रहा. पूरे दिन के धार्मिक अनुष्ठानों और शोभायात्रा के बाद, शनिवार की रात माता की प्रतिमा का विसर्जन किया गया. गाजे-बाजे और जय माता दी के नारों के बीच रात के अंधेरे में टॉर्च और लाइटों की रोशनी में विसर्जन यात्रा निकाली गई. विदाई की इस बेला में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा. अगले बरस तू जल्दी आ… के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा. -धार्मिक अनुष्ठानों और मेले का आकर्षण- इससे पूर्व पंडित विकास झा के सानिध्य में हुए भव्य हवन और दो दिवसीय अखंड अष्टयाम संकीर्तन ने क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. हरे-राम, हरे-कृष्ण… के संकीर्तन से टेमाभेला और आसपास के गांवों का माहौल भक्तिमय बना रहा. वहीं तीन दिवसीय मेले के अंतिम दिन भी भारी भीड़ देखी गई, जहां बच्चों और महिलाओं ने जमकर खरीदारी और मनोरंजन का आनंद लिया. इस पूरे महोत्सव को सफल बनाने में पूजा समिति के अध्यक्ष अरविंद यादव, उपाध्यक्ष रिंकू झा, रामानंद यादव और कोषाध्यक्ष ब्रह्मानंद सिंह ने अहम भूमिका निभाई. विसर्जन के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए नित्यानंद यादव, डॉ शेखर झा, विवेक झा सहित ग्रामीण युवाओं की टीम पूरी रात सक्रिय रही. शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में आयोजन संपन्न होने पर समिति ने सभी ग्रामीणों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया.
भक्तिमय माहौल में चैती नवरात्र संपन्न: टेमाभेला में खोंइछा भर महिलाओं ने मां दुर्गा को दी विदाई
गाजे-बाजे और जय माता दी के नारों के बीच रात के अंधेरे में टॉर्च और लाइटों की रोशनी में विसर्जन यात्रा निकाली गई.
