Madhepura News: मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज अंचल कार्यालय के बाहर गुरुवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब दर्जनों लोगों ने जमीन संबंधी मामलों के निष्पादन में देरी, कथित घूसखोरी और प्रशासनिक टालमटोल के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दाखिल-खारिज, जमाबंदी और अन्य राजस्व मामलों में महीनों तक चक्कर लगाने के बावजूद उनका काम नहीं हो रहा है और कर्मचारियों के माध्यम से 40 से 50 हजार रुपये तक की रिश्वत मांगी जा रही है. दूसरी ओर अंचलाधिकारी स्वाति झा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
अंचल कार्यालय के बाहर जमा हुए लोग, लगाए गंभीर आरोप
गुरुवार को उदाकिशुनगंज अंचल कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और जमीन संबंधी मामलों के निष्पादन में कथित अनियमितता के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि कार्यालय में आम नागरिकों के काम समय पर नहीं हो रहे हैं और उन्हें बार-बार अलग-अलग कर्मचारियों के पास भेज दिया जाता है.
प्रदर्शनकारियों में चंदन कुमार, दिलीप कुमार भारती, झूमा देवी समेत कई लोग शामिल थे.
“एलआरडीसी कोर्ट से फैसला मिला, फिर भी दाखिल-खारिज नहीं हुआ”
गोपालपुर निवासी चंदन कुमार ने बताया कि एलआरडीसी न्यायालय से उनके पक्ष में निर्णय आने के बाद उन्होंने दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था. उनका आरोप है कि आवेदन को अस्वीकार कर दोबारा आवेदन करने के लिए कहा गया.
उन्होंने दावा किया कि अंचल कर्मियों और नाजिर के माध्यम से काम कराने के लिए 40 से 50 हजार रुपये की मांग की गई.
“कभी कर्मचारी, कभी डाटा ऑपरेटर, कभी लिपिक के पास भेजा जाता है”
प्रदर्शन में शामिल दिलीप कुमार भारती ने आरोप लगाया कि सक्षम न्यायालय के आदेश के बावजूद उनकी जमाबंदी नहीं की जा रही है.
उनका कहना है कि हर बार उन्हें अलग-अलग कर्मचारियों के पास भेज दिया जाता है और अधिक पूछताछ करने पर फटकार लगाकर कार्यालय से लौटा दिया जाता है.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह स्थिति केवल एक-दो लोगों की नहीं, बल्कि कई आवेदकों के साथ हो रही है.
सीओ के नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहने का भी आरोप
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अंचलाधिकारी नियमित रूप से कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहती हैं. उनका कहना है कि सीओ सीमित समय के लिए बैठती हैं और उसके बाद कार्यालय छोड़ देती हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले लोगों को बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है.
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन संबंधी मामलों में देरी का सीधा असर किसानों, छोटे भू-स्वामियों और परिवारों के कानूनी अधिकारों पर पड़ता है.
विवाह अनुदान योजना की जांच लंबित होने का आरोप
पूर्व मुखिया निशांत कुमार मिश्रा ने भी प्रदर्शन के दौरान एक अलग मामला उठाया. उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी आश्रित विवाह अनुदान योजना के तहत उनकी पुत्री शिक्षा कुमारी के आवेदन की जांच के लिए 23 जून को आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक जांच नहीं की गई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में भी लगातार टालमटोल की जा रही है.
नाजिर पर भी लगे घूस लेने के आरोप
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अंचल कार्यालय के नाजिर पर भी बिना “चढ़ावा” लिए कोई काम नहीं करने का आरोप लगाया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न है.
अंचलाधिकारी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
इस पूरे मामले पर अंचलाधिकारी स्वाति झा ने कहा कि अंचल कर्मियों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं.
उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यालय में सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार किए जाते हैं.
Madhepura News: जमीन संबंधी मामलों में बढ़ रही शिकायतें
बिहार के कई जिलों में दाखिल-खारिज, जमाबंदी, म्यूटेशन और राजस्व अभिलेखों से जुड़े मामलों में देरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. उदाकिशुनगंज की यह घटना भी बताती है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है.
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस मामले की जांच कर आरोपों की सत्यता की पुष्टि करता है या नहीं और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होती है.
